आश्रम के चारो ओर जितने भी गांव थे सभी गांवों के हर गलियों को ,घरों को यहाँ तक कि लोगों को भी जानने लगा था | आज भी मेरे अपने पडोसी मुझको नहीं जानते हैं किन्तु वहां सभी जानते थे | एकबार भिक्छा मांगने हम अपने मामा गांव {बोहरबा-उजान }गए | प्रथम भिक्क्षा अपनी नानी से ली जो मेरी नानी को मरने जैसा लगा फिर नानी ने उस गांव में मांगने नहीं दिया साथ प्रचूर मात्रा में यहीं वस्तु मिल गयी | संसार में एक नानी ही थी जिसको मुझ पर दया आयी | एक दिन हम अपनी दयनीय स्थिति को जानने हेतु गुरूजी से कुण्डली देखने का निवेदन किया उन्होंने कहा एक दिन तुम राजा बनोगे पर मुझको यकीं नहीं आया | तमाम संस्कृत के ग्रन्थों को जानने के बाद एक कुर्मी बिरादरी के गुरूजी आये क्योंकि यहाँ राष्ट्रिय संस्कृत संस्थान नव दिल्ली की शाखा खुली उसमें एक संगीत गुरूजी की जरुरत थी | उन्होंने सभी को संगीत सिखाने लगे हम उनके सबसे प्रिय थे क्योंकि मेरे स्वर उनको ठीक लगते थे | उन गुरूजी को केवल नौकरी की लालसा थी अन्यथा धन के और शास्त्रीय संगीत के राजा थे | जितने छात्र थे वो केवल परीक्षा देने योग्य संगीत सीखना चाहते थे पर मैं निपुन गायक बनना चाहता था | मुझको उन्होंने बनाने की कोशिश की | मेरा स्वर तो सुन्दर थे पर तीव्र स्वर गड़बड़ तो उन्होंने मेरे गले में हलवा बांधा करते थे जिससे स्वर उत्तम बनें पर मैं भूखा उस हलवा को छुपके से खा जाता था | उन्होंने मुझको पिता की तरह स्नेह दिया मैंने भी पुत्र की तरह निभाया | उन्होंने मुझको दसों रागों का अभ्यास कराया पर मेरा भाग्य सरकार ने उनको नौकरी नहीं दी क्योंकि कुर्मी जाति के थे | मेरे संगीत की राह अधूरी रह गई | अब हम वैदिक गुरूजी के साथ यज्ञ में जाने लगे | गुरूजी के साथ रहकर हमने तमाम यज्ञों को जाना | मेरे सरकार त्रिकाल स्नान और त्रिकाल पूजा करते थे | मेरे सरकार ने अथक परिश्रम से वहां विद्यालय ,महाविद्यालय और सग्रहालय बनाये | मैं भी सरकार की तरह बनना चाहता था | ----आगे की परिचर्चा कल करेंगें |---ॐ -दोस्तों आप भी अपनी -अपनी राशि के स्वभाव और प्रभाव को पढ़ना चाहते हैं या आपकी राशि पर लिखी हुई बातें मिलतीं हैं कि नहीं परखना चाहते हैं तो इस पेज पर पधारकर पखकर देखें -https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut
ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी -ज्योतिषी झा मेरठ
ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी -ज्योतिषी झा मेरठ 1 -कुण्डली मिलान का शुल्क 2200 सौ रूपये हैं | 2--हमसे बातचीत [परामर्श ] शुल्क है पांच सौ रूपये हैं | 3 -जन्म कुण्डली की जानकारी मौखिक और लिखित लेना चाहते हैं -तो शुल्क एग्ग्यारह सौ रूपये हैं | 4 -सम्पूर्ण जीवन का फलादेश लिखित चाहते हैं तो यह आपके घर तक पंहुचेगा शुल्क 11000 हैं | 5 -विदेशों में रहने वाले व्यक्ति ज्योतिष की किसी भी प्रकार की जानकारी करना चाहेगें तो शुल्क-2200 सौ हैं |, --6--- आजीवन सदसयता शुल्क -एक लाख रूपये | -- नाम -के एल झा ,स्टेट बैंक मेरठ, आई एफ एस सी कोड-SBIN0002321,A/c- -2000 5973259 पर हमें प्राप्त हो सकता है । आप हमें गूगल पे, पे फ़ोन ,भीम पे,पेटीएम पर भी धन भेज सकते हैं - 9897701636 इस नंबर पर |-- ॐ आपका - ज्योतिषी झा मेरठ, झंझारपुर और मुम्बई----ज्योतिष और कर्मकांड की अनन्त बातों को पढ़ने हेतु या सुनने के लिए प्रस्तुत लिंक पर पधारें -https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut
शनिवार, 23 सितंबर 2023
मेरा" कल आज और कल -पढ़ें --ज्योतिषी झा "मेरठ "भाग -8
आश्रम के चारो ओर जितने भी गांव थे सभी गांवों के हर गलियों को ,घरों को यहाँ तक कि लोगों को भी जानने लगा था | आज भी मेरे अपने पडोसी मुझको नहीं जानते हैं किन्तु वहां सभी जानते थे | एकबार भिक्छा मांगने हम अपने मामा गांव {बोहरबा-उजान }गए | प्रथम भिक्क्षा अपनी नानी से ली जो मेरी नानी को मरने जैसा लगा फिर नानी ने उस गांव में मांगने नहीं दिया साथ प्रचूर मात्रा में यहीं वस्तु मिल गयी | संसार में एक नानी ही थी जिसको मुझ पर दया आयी | एक दिन हम अपनी दयनीय स्थिति को जानने हेतु गुरूजी से कुण्डली देखने का निवेदन किया उन्होंने कहा एक दिन तुम राजा बनोगे पर मुझको यकीं नहीं आया | तमाम संस्कृत के ग्रन्थों को जानने के बाद एक कुर्मी बिरादरी के गुरूजी आये क्योंकि यहाँ राष्ट्रिय संस्कृत संस्थान नव दिल्ली की शाखा खुली उसमें एक संगीत गुरूजी की जरुरत थी | उन्होंने सभी को संगीत सिखाने लगे हम उनके सबसे प्रिय थे क्योंकि मेरे स्वर उनको ठीक लगते थे | उन गुरूजी को केवल नौकरी की लालसा थी अन्यथा धन के और शास्त्रीय संगीत के राजा थे | जितने छात्र थे वो केवल परीक्षा देने योग्य संगीत सीखना चाहते थे पर मैं निपुन गायक बनना चाहता था | मुझको उन्होंने बनाने की कोशिश की | मेरा स्वर तो सुन्दर थे पर तीव्र स्वर गड़बड़ तो उन्होंने मेरे गले में हलवा बांधा करते थे जिससे स्वर उत्तम बनें पर मैं भूखा उस हलवा को छुपके से खा जाता था | उन्होंने मुझको पिता की तरह स्नेह दिया मैंने भी पुत्र की तरह निभाया | उन्होंने मुझको दसों रागों का अभ्यास कराया पर मेरा भाग्य सरकार ने उनको नौकरी नहीं दी क्योंकि कुर्मी जाति के थे | मेरे संगीत की राह अधूरी रह गई | अब हम वैदिक गुरूजी के साथ यज्ञ में जाने लगे | गुरूजी के साथ रहकर हमने तमाम यज्ञों को जाना | मेरे सरकार त्रिकाल स्नान और त्रिकाल पूजा करते थे | मेरे सरकार ने अथक परिश्रम से वहां विद्यालय ,महाविद्यालय और सग्रहालय बनाये | मैं भी सरकार की तरह बनना चाहता था | ----आगे की परिचर्चा कल करेंगें |---ॐ -दोस्तों आप भी अपनी -अपनी राशि के स्वभाव और प्रभाव को पढ़ना चाहते हैं या आपकी राशि पर लिखी हुई बातें मिलतीं हैं कि नहीं परखना चाहते हैं तो इस पेज पर पधारकर पखकर देखें -https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut
आत्मकथा क्यों लिखी या बोली सुनें -ज्योतिषी झा मेरठ
दोस्तों आत्मकथा एक सोपान हैं | प्रथम सोपान एक से तैतीस भाग तक ,दूसरा सोपान तैतीस भाग से बानवें भाग तक और अन्तिम सोपान बानवें भाग से अन्त तक -इसके बारे में कुछ कहना चाहता हूँ सुनें --आपकी राशि पर लिखी हुई बातें मिलती है कि नहीं परखकर देखें -
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