ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी -ज्योतिषी झा मेरठ
ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी -ज्योतिषी झा मेरठ 1 -कुण्डली मिलान का शुल्क 2200 सौ रूपये हैं | 2--हमसे बातचीत [परामर्श ] शुल्क है पांच सौ रूपये हैं | 3 -जन्म कुण्डली की जानकारी मौखिक और लिखित लेना चाहते हैं -तो शुल्क एग्ग्यारह सौ रूपये हैं | 4 -सम्पूर्ण जीवन का फलादेश लिखित चाहते हैं तो यह आपके घर तक पंहुचेगा शुल्क 11000 हैं | 5 -विदेशों में रहने वाले व्यक्ति ज्योतिष की किसी भी प्रकार की जानकारी करना चाहेगें तो शुल्क-2200 सौ हैं |, --6--- आजीवन सदसयता शुल्क -एक लाख रूपये | -- नाम -के एल झा ,स्टेट बैंक मेरठ, आई एफ एस सी कोड-SBIN0002321,A/c- -2000 5973259 पर हमें प्राप्त हो सकता है । आप हमें गूगल पे, पे फ़ोन ,भीम पे,पेटीएम पर भी धन भेज सकते हैं - 9897701636 इस नंबर पर |-- ॐ आपका - ज्योतिषी झा मेरठ, झंझारपुर और मुम्बई----ज्योतिष और कर्मकांड की अनन्त बातों को पढ़ने हेतु या सुनने के लिए प्रस्तुत लिंक पर पधारें -https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut
बुधवार, 5 मार्च 2025
ग्रहों के स्थान सम्बन्ध ज्योतिष कक्षा - जानें -पढ़ें -भाग -67-खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ
जब कोई भी दो ग्रह अलग -अलग एक दूसरे के स्थान में बैठे हों ,तो उसे उन ग्रहों का स्थान सम्बन्ध कहा जाता है | आगे उदहारण से समझें ----किसी मेष लग्न की कुण्डली में बुध के स्थान ,मिथुन पर शुक्र बैठा है तथा शुक्र के स्थान ,तुला राशि पर बुध बैठा है | इस प्रकार दोनों ग्रह अपने -अपने स्थान छोड़कर एक दूसरे के स्थान पर बैठे हुए हैं ,--अतः इसे शुक्र तथा बुध का स्थान सम्बन्ध कहा जायेगा | इसी प्रकार अन्य ग्रहों के स्थान -सम्बन्ध के विषय में भी समझ लेना चाहिए | -----उपरोक्त पारस्परिक दृष्टि -सम्बन्ध तथा स्थान -सम्बन्ध का प्रभाव यह होता है कि ग्रहों का ऐसा पारस्परिक सम्बन्ध होने पर वो अपने -अपने गुण,कर्म तथा स्वभाव को एक दूसरे से मिलाकर जातक के जीवन पर प्रभाव डालते हैं ,अर्थात ---एक ग्रह में दूसरे ग्रह का स्वभाव सम्मिलित हो जाता है | किन्तु इन सम्बन्धों में मुख्य बात विचार करने की यह है कि पारस्परिक सम्बन्ध वाले दोनों ग्रह आपस में मित्र हैं ,शत्रु हैं अथवा सम भाव रखने वाले हैं | वो जातक के जीवन पर एक -दूसरे के विपरीत विशेष प्रभाव डालेंगें और यदि समभाव रखने वाले होंगें ,तो संयुक्त सामान्य प्रभाव डालेंगें | ---------नोट --ग्रहों के उक्त पारस्परिक सम्बन्धों पर विचार करते समय उनके उच्च राशिगत ,मूल त्रिकोण राशिगत ,नीच राशिगत ,स्वक्षेत्रगत अथवा शत्रु क्षेत्रगत होने आदि पर भी विचार कर लेना चाहिए ,क्योंकि इन सब बातों पर विचार करने के उपरांत सबके समन्वय एवं निष्कर्ष के रूप में जो फल निकलता है ,वो ही जातक के जीवन पर घटित होता है | ---अगले भाग में स्थानाधपति पर परिचर्चा करेंगें --- - -भवदीय निवेदक खगोलशास्त्री झा मेरठ -ज्योतिष की समस्त जानकारी के लिए इस लिंक पर पधारें khagolshastri.blogspot.com
आत्मकथा क्यों लिखी या बोली सुनें -ज्योतिषी झा मेरठ
दोस्तों आत्मकथा एक सोपान हैं | प्रथम सोपान एक से तैतीस भाग तक ,दूसरा सोपान तैतीस भाग से बानवें भाग तक और अन्तिम सोपान बानवें भाग से अन्त तक -इसके बारे में कुछ कहना चाहता हूँ सुनें --आपकी राशि पर लिखी हुई बातें मिलती है कि नहीं परखकर देखें -
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खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ
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