ॐ -आज आत्मकथा में अबलोकन यह कराना चाहता हूँ कि व्यक्ति थोड़े में भी खुश हो सकता है और बहुत होने पर भी असंतुष्ट रह सकता है | अस्तु --मैं जब 15 वर्ष का था तो अनायास मेरी कुण्डली में विवाह योग पर नजर गयी --तब मैं अल्पज्ञानी ज्योतिषी था -उस बात पर यकीं नहीं हुआ ,समय की अपनी गति होती है सो मेरी कुण्डली में राहु की महादशा चल रही थी -राहु सप्तम भाव में विराजमान है -विवाह होना समय से पूर्व निर्धारित था | मेरा विवाह ऐसे परिवार में हुआ जहाँ हरा भरा परिवार था किन्तु विवाह होते -दोनों साले और ससुर अनायास दिवंगत हो गए साल भर के अन्दर --यह बात मैं पहले से जनता था किन्तु विवाह के समय यकीं नहीं आया | यह राहु की महादशा विवाह से दस वर्ष बाद तक रही तब मैं दाम्पत्य सुख से विमुख रहता था --भार्या पलकें बिछाए इंतजार करती थी ,ईस्वर की आराधना करती थी ,सभी देवताओं से नित्य दुका माँगा करती थी --इसका परिणाम यह हुआ -मेरी शिक्षा उत्तम दर्जे की शुरू हुई किन्तु अधूरी रह गयी | मेरा परिवार रसातल चला गया --खुद दर -दर भटकने लगा | फिर गुरु की दशा चली तो शिक्षा फिर से शुरू हो गयी --अब भाग्योदय और दाम्पत्य सुख के साथ -संतान ,भवन ,वाहन तमाम सुख प्राप्त होने लगे | इसके बाद शनि की दशा चालू हुई तो -रोग ,शत्रुता और दाम्पत्य क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुए | यद्यपि -धन ,प्रभावक्षेत्र बहुत ही मजबूत थे --पर सबकुछ होते हुए भी बहुत दुःखी रहने लगे -हमारा हरा -भरा परिवार था ,सभी परिजन सुखी थे ,माता पिता की छत्रछाया थी --किन्तु जिस भार्या के बल से महान हुए थे -उसकी छत्रछाया से हम दूर होते चले गए | दुनिया की नजर में हम दोनों सुखी थे किन्तु अंदर से एक दूसरे के शत्रु थे | वैसे ही जैसे -भाई -भाई तो थे पर दोनों सदा एक दूसरे के शत्रु रहे | माता पिता तो थे पर उनके हम सबसे बड़े शत्रु थे | भाई -बहिन तो थे किन्तु आपस में शत्रु थे --सभी परिजन तो थे किन्तु हम सबके शत्रु थे | आज तक अपने जीवन में हमने किसी से याचना नहीं की है अपने श्रम से चाहे -शिक्षा हो या धन या फिर अनन्त जिज्ञासा इसके लिए सदा कर्म और भाग्य पर निर्भर रहे --इसके लिए ईस्वर की शरण को ही बेहतर समझा फिर भी -सबके शत्रु हो गए | आज जब एक सफल खगोलशास्त्री हैं --तो यह समझ में आ रहा है -आज से बेहतर कल हो ही नहीं सकता है | अतः हर व्यक्ति को जो कुछ भी जब मिले उसी में प्रसन्नता रखनी चाहिए --अन्यथा -जीवन में सुख की अपेक्षा दुःख का सामना ही विशेष होता है | ----भवदीय निवेदक खगोलशास्त्री झा मेरठ -ज्योतिष की समस्त जानकारी के लिए इस लिंक पर पधारें khagolshastri.blogspot.com
ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी -ज्योतिषी झा मेरठ
ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी -ज्योतिषी झा मेरठ 1 -कुण्डली मिलान का शुल्क 2200 सौ रूपये हैं | 2--हमसे बातचीत [परामर्श ] शुल्क है पांच सौ रूपये हैं | 3 -जन्म कुण्डली की जानकारी मौखिक और लिखित लेना चाहते हैं -तो शुल्क एग्ग्यारह सौ रूपये हैं | 4 -सम्पूर्ण जीवन का फलादेश लिखित चाहते हैं तो यह आपके घर तक पंहुचेगा शुल्क 11000 हैं | 5 -विदेशों में रहने वाले व्यक्ति ज्योतिष की किसी भी प्रकार की जानकारी करना चाहेगें तो शुल्क-2200 सौ हैं |, --6--- आजीवन सदसयता शुल्क -एक लाख रूपये | -- नाम -के एल झा ,स्टेट बैंक मेरठ, आई एफ एस सी कोड-SBIN0002321,A/c- -2000 5973259 पर हमें प्राप्त हो सकता है । आप हमें गूगल पे, पे फ़ोन ,भीम पे,पेटीएम पर भी धन भेज सकते हैं - 9897701636 इस नंबर पर |-- ॐ आपका - ज्योतिषी झा मेरठ, झंझारपुर और मुम्बई----ज्योतिष और कर्मकांड की अनन्त बातों को पढ़ने हेतु या सुनने के लिए प्रस्तुत लिंक पर पधारें -https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut
गुरुवार, 3 जुलाई 2025
मेरी आत्मकथा पढ़ें भाग -109 - खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ
ॐ -आज आत्मकथा में अबलोकन यह कराना चाहता हूँ कि व्यक्ति थोड़े में भी खुश हो सकता है और बहुत होने पर भी असंतुष्ट रह सकता है | अस्तु --मैं जब 15 वर्ष का था तो अनायास मेरी कुण्डली में विवाह योग पर नजर गयी --तब मैं अल्पज्ञानी ज्योतिषी था -उस बात पर यकीं नहीं हुआ ,समय की अपनी गति होती है सो मेरी कुण्डली में राहु की महादशा चल रही थी -राहु सप्तम भाव में विराजमान है -विवाह होना समय से पूर्व निर्धारित था | मेरा विवाह ऐसे परिवार में हुआ जहाँ हरा भरा परिवार था किन्तु विवाह होते -दोनों साले और ससुर अनायास दिवंगत हो गए साल भर के अन्दर --यह बात मैं पहले से जनता था किन्तु विवाह के समय यकीं नहीं आया | यह राहु की महादशा विवाह से दस वर्ष बाद तक रही तब मैं दाम्पत्य सुख से विमुख रहता था --भार्या पलकें बिछाए इंतजार करती थी ,ईस्वर की आराधना करती थी ,सभी देवताओं से नित्य दुका माँगा करती थी --इसका परिणाम यह हुआ -मेरी शिक्षा उत्तम दर्जे की शुरू हुई किन्तु अधूरी रह गयी | मेरा परिवार रसातल चला गया --खुद दर -दर भटकने लगा | फिर गुरु की दशा चली तो शिक्षा फिर से शुरू हो गयी --अब भाग्योदय और दाम्पत्य सुख के साथ -संतान ,भवन ,वाहन तमाम सुख प्राप्त होने लगे | इसके बाद शनि की दशा चालू हुई तो -रोग ,शत्रुता और दाम्पत्य क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुए | यद्यपि -धन ,प्रभावक्षेत्र बहुत ही मजबूत थे --पर सबकुछ होते हुए भी बहुत दुःखी रहने लगे -हमारा हरा -भरा परिवार था ,सभी परिजन सुखी थे ,माता पिता की छत्रछाया थी --किन्तु जिस भार्या के बल से महान हुए थे -उसकी छत्रछाया से हम दूर होते चले गए | दुनिया की नजर में हम दोनों सुखी थे किन्तु अंदर से एक दूसरे के शत्रु थे | वैसे ही जैसे -भाई -भाई तो थे पर दोनों सदा एक दूसरे के शत्रु रहे | माता पिता तो थे पर उनके हम सबसे बड़े शत्रु थे | भाई -बहिन तो थे किन्तु आपस में शत्रु थे --सभी परिजन तो थे किन्तु हम सबके शत्रु थे | आज तक अपने जीवन में हमने किसी से याचना नहीं की है अपने श्रम से चाहे -शिक्षा हो या धन या फिर अनन्त जिज्ञासा इसके लिए सदा कर्म और भाग्य पर निर्भर रहे --इसके लिए ईस्वर की शरण को ही बेहतर समझा फिर भी -सबके शत्रु हो गए | आज जब एक सफल खगोलशास्त्री हैं --तो यह समझ में आ रहा है -आज से बेहतर कल हो ही नहीं सकता है | अतः हर व्यक्ति को जो कुछ भी जब मिले उसी में प्रसन्नता रखनी चाहिए --अन्यथा -जीवन में सुख की अपेक्षा दुःख का सामना ही विशेष होता है | ----भवदीय निवेदक खगोलशास्त्री झा मेरठ -ज्योतिष की समस्त जानकारी के लिए इस लिंक पर पधारें khagolshastri.blogspot.com
आत्मकथा क्यों लिखी या बोली सुनें -ज्योतिषी झा मेरठ
दोस्तों आत्मकथा एक सोपान हैं | प्रथम सोपान एक से तैतीस भाग तक ,दूसरा सोपान तैतीस भाग से बानवें भाग तक और अन्तिम सोपान बानवें भाग से अन्त तक -इसके बारे में कुछ कहना चाहता हूँ सुनें --आपकी राशि पर लिखी हुई बातें मिलती है कि नहीं परखकर देखें -
khagolshastri.blogspot.com
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ (Atom)
खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ
भविष्यवाणी -04 /03 /26 से 19 /03 /26 -तक की पढ़ें -खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ
ॐ श्रीसंवत -2082 -शाके -1947 -चैत्र कृष्णपक्ष --तदनुसार दिनांक -04 /03 /2026 से 19 /03 /2026 तक -ज्योतिष की भविष्यवाणी की बात करें --वैसे पं...
-
ॐ नववर्ष -2025 ,संवत -2082 का आगमन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा दिनांक -29 /03 /2025 को मीन के चन्द्रमा के समय होगा | नववर्ष प्रवेश के समय देश की रा...
-
ॐ आषाढ़ शुक्ल गुरुवार ,26 जून 2025 को 1447 को हिजरी सन प्रारम्भ होगा | भारतीय उपमहाद्वीप में मुस्लिम वर्ग की प्रवित्तियों के अध्ययन के लिए दै...
-
ॐ-मंगल - वर्ष के आरम्भ -{चैत्र शुक्लपक्ष }को पुनर्वसु -तृतीयचरण ,मिथुन राशि में उदित अवस्था में है | यह पूरे वर्ष मार्गी रहेगा | मंगल 02 /11...
-
ॐ श्रीसंवत -2082 --शाके -1947 आश्विन शुक्लपक्ष -तदनुसार दिनांक -22 /09 /2025 से 07 /10 / 2025 तक देश -विदेश भविष्यवाणी की बात करें --नवरात्...
-
हमारे ज्योतिष एवं कर्मकाण्ड क्वे नियमित पाठकगण --जीवन भर लोगों की कुण्डलियों का आकलन करते रहे पर अपनी जन्मकुण्डली को देखने का गुरु का आदेश ...
-
ॐ --आत्मकथा के पाठकगण --प्रत्येक व्यक्ति का यह सातवां घर बहुत ही मार्मिक एवं गुप्त होता है | मेरी कुण्डली की नींव लग्न प्रथम घर बहुत ही सशक्...
-
ॐ --मेरी कुण्डली का छठा घर -जो रोग और शत्रुओं का है --मेरे जीवन में जन्म से लेकर आज तक कभी ऐसा नहीं रहा जब हम रोग और शत्रुओं से घिरे न रहे ह...
-
ॐ --बांग्लादेश की स्थापना की कुण्डली में गुरु ,बुध और चंद्र -वृष्चिक राशि में स्थित है | इन पर शनि और केतु की दृष्टि पड़ रही है | --पाठकों को...
-
ॐ --हमारे पाठकगण --मेरी कुण्डली सिंह लग्न की है | पांचवा घर गुरु का है एवं गुरु- शुक्र राशि तृतीय घर -पराक्रम क्षेत्र में विराजमान हैं | इस ...
-
दोस्तों --अगर नेट की दुनिया नहीं होती तो ज्यादा से ज्यादा जीवन में 5000 कुण्डली देख पाते ,किन्तु नेट के कारण और फ्री सेवा के कारण लाखों कुण्...
