हमारे ज्योतिष एवं कर्मकाण्ड क्वे नियमित पाठकगण --जीवन भर लोगों की कुण्डलियों का आकलन करते रहे पर अपनी जन्मकुण्डली को देखने का गुरु का आदेश नहीं था -अतः जीवन भर कर्मकाण्ड के पथ पर मेरा जीवन चलता रहा | जब अपनी आत्मकथा में अपनी कमियों को ढूंढ रहा था --तो अनुभव हुआ -जैसे दीपक के नीचे अँधेरा होता है --वैसा ही मेरा जीवन रहा --अगर मुझे यह अनुभव होता कि हमारी कुण्डली क्या कहती है और मुझे क्या करना चाहिए साथ ही परिस्थिति होती और सही मार्गदर्शन दाता होते तो शायद मेरा भी जीवन कुछ और होता | भारत भूमि पर एक कहावत है जस देवता तस गरगरी --अर्थात -- ज्यादातर लोग केवल जन्मपत्री में यकीं तो करते हैं -पर निदान शून्य होता है --इसका प्रभाव जीवन भर भ्रान्ति में जन्मपत्री लेकर भटकते रहते हैं --थोर -बहुत जो भरोसा होता है वह भी समाप्त हो जाता है | अंत में हर व्यक्ति को ज्योतिष और ज्योतिषी पर विस्वास खत्म हो जाता है | जबकि --मुझे अनुभव हुआ है --सही मार्गदर्शन सही संस्कारों के बाद ही संभव है | आज हर व्यक्ति गरीबी रेखा से आगे है --पर संस्कार के मामले में सबसे गरीब होता जा रहा है --जब संस्कार नहीं तो ज्योतिष का लाभ वैदिक की जगह -तंत्र मन्त्र से लेना चाहते हैं --जिसका परिणाम तनिक देर के लिए लाभ दे सकता है दीर्घकाल नहीं --हो सके तो संस्कारों को अमल करें -अपने बच्चों में डालें | ---अस्तु ---कुण्डली का नवां घर --भाग्य कहलाता है | मेरा भाग्य बहुत ही अच्छा रहा भौतिक जीवन के लिए --किन्तु मेरी आत्मा कभी खुश नहीं रही --क्यों ? --एक शास्त्री ब्राहण के लिए कुछ नियम होते हैं --जिनका हमें पालन करना चाहिए -आज के समय जब केवल धन से व्यक्ति का आकलन होता है --उसमें तो मैं राजा हो गया | धन कहीं से कैसे भी आये अगर यह जीवन है तो हमारे परिजन खुश हो सकते हैं --पर मेरी आत्मा कभी खुश नहीं हुई | धन कमाना था ,गरीबी से उठना था --मेरी कुण्डली के नवम भाव में शनि नीच का विराजमान है साथ ही गुरु की पूर्ण दृस्टि पड़ रही है और नवम घर का स्वामी मंगल मित्र सूर्य की राशि में लगन में है --लगन में सूर्य और मंगल की युति है --हमने धन की चाहत में इस योग को जानने के लिए -बहुत ग्रंथों को पढ़ा, यह योग का ज्ञान मुझे केवल 13 वर्ष में श्रीमाली जी की राशिफल किताब से अनुभव हो चूका था --जब मेरी कुण्डली में दरिद्र योग चल रहा था --कईबार मुझे ग्रंथों पर भरोसा नहीं रहा --क्योंकि कुण्डली का लाभ धन का मुझे जब हम -30 वर्ष के हुए तब अनायास मिला | तबतक ज्योतिष से यकीन हट चूका था -हम अपने आपको निःसहाय मानने लगे थे | मेरा विवाह -1990 में हुआ किन्तु --अनायास --1999 में पतनी मेरे पास मेरठ आयी --तब अनायास मेरा भाग्योदय हुआ | पहले सदा हम यह सोचते थे यह उचित नहीं है -तर्क और कुतर्क के घेरे में सदा रहते थे -किन्तु पतनी आने के बाद यह सोच हट गयी --केवल धन चाहिए -- क्योकि भाग्य में नीच का शनि है --तो नीच व्यक्ति से ही लाभ मिलेगा | जो धार्मिक थे जिनके लिए जीवन भर चाकरी की उन्होनें कुछ नहीं दिया --जो नीच प्रवृत्ति के थे --उन्होनें कार्य होते ही मुठी भर -भर के दिए | --आज लोग मुझे ज्ञान से नहीं धन से जानते हैं --इस बात से मैं बहुत दुःखी रहता हूँ | जबकि जीवन भर ज्ञान के लिए ही कोशिश की है --आज भी सदा प्रयास रखता हूँ --ज्ञान की खोज करें --जिसका लाभ कभी नहीं मिला | धन अनायास और थोड़े से प्रयास में बहुत मिला है --जिसका स्वभाव से मेरे लिए महत्व नहीं होता है | --हम सदा चाहते हैं --पढ़ें ,पढ़ाएं ,दान लें दान दें ,यज्ञ करें और कराएं ---पर इन नियमों पर सभी नहीं उतरते हैं इसका मुझे बहुत ही मलाल रहता है | --अगले भाग में मेरी कुण्डली का दशवां घर पर चर्चा करेंगें ---भवदीय निवेदक खगोलशास्त्री झा मेरठ -ज्योतिष की समस्त जानकारी के लिए इस लिंक पर पधारें khagolshastri.blogspot.com
ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी -ज्योतिषी झा मेरठ
ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी -ज्योतिषी झा मेरठ 1 -कुण्डली मिलान का शुल्क 2200 सौ रूपये हैं | 2--हमसे बातचीत [परामर्श ] शुल्क है पांच सौ रूपये हैं | 3 -जन्म कुण्डली की जानकारी मौखिक और लिखित लेना चाहते हैं -तो शुल्क एग्ग्यारह सौ रूपये हैं | 4 -सम्पूर्ण जीवन का फलादेश लिखित चाहते हैं तो यह आपके घर तक पंहुचेगा शुल्क 11000 हैं | 5 -विदेशों में रहने वाले व्यक्ति ज्योतिष की किसी भी प्रकार की जानकारी करना चाहेगें तो शुल्क-2200 सौ हैं |, --6--- आजीवन सदसयता शुल्क -एक लाख रूपये | -- नाम -के एल झा ,स्टेट बैंक मेरठ, आई एफ एस सी कोड-SBIN0002321,A/c- -2000 5973259 पर हमें प्राप्त हो सकता है । आप हमें गूगल पे, पे फ़ोन ,भीम पे,पेटीएम पर भी धन भेज सकते हैं - 9897701636 इस नंबर पर |-- ॐ आपका - ज्योतिषी झा मेरठ, झंझारपुर और मुम्बई----ज्योतिष और कर्मकांड की अनन्त बातों को पढ़ने हेतु या सुनने के लिए प्रस्तुत लिंक पर पधारें -https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut
सोमवार, 6 अक्टूबर 2025
मेरी कुण्डली का नवां घर आत्मकथा पढ़ें -भाग -123 - ज्योतिषी झा मेरठ
हमारे ज्योतिष एवं कर्मकाण्ड क्वे नियमित पाठकगण --जीवन भर लोगों की कुण्डलियों का आकलन करते रहे पर अपनी जन्मकुण्डली को देखने का गुरु का आदेश नहीं था -अतः जीवन भर कर्मकाण्ड के पथ पर मेरा जीवन चलता रहा | जब अपनी आत्मकथा में अपनी कमियों को ढूंढ रहा था --तो अनुभव हुआ -जैसे दीपक के नीचे अँधेरा होता है --वैसा ही मेरा जीवन रहा --अगर मुझे यह अनुभव होता कि हमारी कुण्डली क्या कहती है और मुझे क्या करना चाहिए साथ ही परिस्थिति होती और सही मार्गदर्शन दाता होते तो शायद मेरा भी जीवन कुछ और होता | भारत भूमि पर एक कहावत है जस देवता तस गरगरी --अर्थात -- ज्यादातर लोग केवल जन्मपत्री में यकीं तो करते हैं -पर निदान शून्य होता है --इसका प्रभाव जीवन भर भ्रान्ति में जन्मपत्री लेकर भटकते रहते हैं --थोर -बहुत जो भरोसा होता है वह भी समाप्त हो जाता है | अंत में हर व्यक्ति को ज्योतिष और ज्योतिषी पर विस्वास खत्म हो जाता है | जबकि --मुझे अनुभव हुआ है --सही मार्गदर्शन सही संस्कारों के बाद ही संभव है | आज हर व्यक्ति गरीबी रेखा से आगे है --पर संस्कार के मामले में सबसे गरीब होता जा रहा है --जब संस्कार नहीं तो ज्योतिष का लाभ वैदिक की जगह -तंत्र मन्त्र से लेना चाहते हैं --जिसका परिणाम तनिक देर के लिए लाभ दे सकता है दीर्घकाल नहीं --हो सके तो संस्कारों को अमल करें -अपने बच्चों में डालें | ---अस्तु ---कुण्डली का नवां घर --भाग्य कहलाता है | मेरा भाग्य बहुत ही अच्छा रहा भौतिक जीवन के लिए --किन्तु मेरी आत्मा कभी खुश नहीं रही --क्यों ? --एक शास्त्री ब्राहण के लिए कुछ नियम होते हैं --जिनका हमें पालन करना चाहिए -आज के समय जब केवल धन से व्यक्ति का आकलन होता है --उसमें तो मैं राजा हो गया | धन कहीं से कैसे भी आये अगर यह जीवन है तो हमारे परिजन खुश हो सकते हैं --पर मेरी आत्मा कभी खुश नहीं हुई | धन कमाना था ,गरीबी से उठना था --मेरी कुण्डली के नवम भाव में शनि नीच का विराजमान है साथ ही गुरु की पूर्ण दृस्टि पड़ रही है और नवम घर का स्वामी मंगल मित्र सूर्य की राशि में लगन में है --लगन में सूर्य और मंगल की युति है --हमने धन की चाहत में इस योग को जानने के लिए -बहुत ग्रंथों को पढ़ा, यह योग का ज्ञान मुझे केवल 13 वर्ष में श्रीमाली जी की राशिफल किताब से अनुभव हो चूका था --जब मेरी कुण्डली में दरिद्र योग चल रहा था --कईबार मुझे ग्रंथों पर भरोसा नहीं रहा --क्योंकि कुण्डली का लाभ धन का मुझे जब हम -30 वर्ष के हुए तब अनायास मिला | तबतक ज्योतिष से यकीन हट चूका था -हम अपने आपको निःसहाय मानने लगे थे | मेरा विवाह -1990 में हुआ किन्तु --अनायास --1999 में पतनी मेरे पास मेरठ आयी --तब अनायास मेरा भाग्योदय हुआ | पहले सदा हम यह सोचते थे यह उचित नहीं है -तर्क और कुतर्क के घेरे में सदा रहते थे -किन्तु पतनी आने के बाद यह सोच हट गयी --केवल धन चाहिए -- क्योकि भाग्य में नीच का शनि है --तो नीच व्यक्ति से ही लाभ मिलेगा | जो धार्मिक थे जिनके लिए जीवन भर चाकरी की उन्होनें कुछ नहीं दिया --जो नीच प्रवृत्ति के थे --उन्होनें कार्य होते ही मुठी भर -भर के दिए | --आज लोग मुझे ज्ञान से नहीं धन से जानते हैं --इस बात से मैं बहुत दुःखी रहता हूँ | जबकि जीवन भर ज्ञान के लिए ही कोशिश की है --आज भी सदा प्रयास रखता हूँ --ज्ञान की खोज करें --जिसका लाभ कभी नहीं मिला | धन अनायास और थोड़े से प्रयास में बहुत मिला है --जिसका स्वभाव से मेरे लिए महत्व नहीं होता है | --हम सदा चाहते हैं --पढ़ें ,पढ़ाएं ,दान लें दान दें ,यज्ञ करें और कराएं ---पर इन नियमों पर सभी नहीं उतरते हैं इसका मुझे बहुत ही मलाल रहता है | --अगले भाग में मेरी कुण्डली का दशवां घर पर चर्चा करेंगें ---भवदीय निवेदक खगोलशास्त्री झा मेरठ -ज्योतिष की समस्त जानकारी के लिए इस लिंक पर पधारें khagolshastri.blogspot.com
आत्मकथा क्यों लिखी या बोली सुनें -ज्योतिषी झा मेरठ
दोस्तों आत्मकथा एक सोपान हैं | प्रथम सोपान एक से तैतीस भाग तक ,दूसरा सोपान तैतीस भाग से बानवें भाग तक और अन्तिम सोपान बानवें भाग से अन्त तक -इसके बारे में कुछ कहना चाहता हूँ सुनें --आपकी राशि पर लिखी हुई बातें मिलती है कि नहीं परखकर देखें -
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