ॐ -वैशाख कृष्ण द्वादशी --दिनांक -14 /04 /2026 मंगलवार प्रातः -09 /31 पर सूर्यदेव मेष संक्रमण करेंगें | इस समय चंद्र कुम्भ राशि में स्थित है | लग्नेश शुक्र द्वादश भाव में सूर्य के साथ बैठा है | बुध पंचमेश होकर पंचम भाव को देख रहा है | नवमेश -दशमेश शनि एकादश भाव से लग्न पर ,पंचम भाव पर और अष्टम भाव पर एवं दशम भाव पर दृष्टि पात कर रहा है | मंगल सप्तम भाव का अधिपति है और छठे भाव को अष्टम दृस्टि से देख रहा है | राहु -केतु ,दशम -चतुर्थ भाव में बैठे हैं | चौथे भाव का अधिपति सूर्य छठे भाव पर दृस्टि डाल रहे हैं | शनि +गुरु और केतु अष्टम भाव पर दृष्टि डाल रहे हैं | बुध नीच का है | --उक्त समस्त ग्रहों के प्रभाव से यह संवत -2026 सरकार के लिए कठिन प्रतीत हो रहा है | भारत के सम्बन्ध कुछ राष्ट्रों के साथ तनावपूर्ण होंगें | युद्ध ,पीड़ा ,प्राकृतिक प्रकोप और हिंसक गतिविधियों के कारण जनधन हानि के व्यापक योग है | अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के कारण सरकार पक्ष को घोर पीड़ा अनुभव होगी | उच्च राजनेताओं पर स्वास्थ संकट मंडरा सकता है | सत्ता पक्ष के लिए यह कठिन है | व्यवसायिक वातावरण में असमंजस्य और अनिश्चितता व्याप्त होगी | उक्त अनिश्चितता के लिए विपक्ष और जनसाधारण सत्ता पक्ष उत्तरदायी बतायेगा |
---केंद्र सत्ता में परिवर्तन के योग पकट हो सकते हैं | शत्रु देशों के गुप्तचर तंत्रों के कारण विशेष पीड़ा अनुभव होगी | वर्ष भर मजहबी -हिंसा और आतंकवादी गतिविधियों का खतरा बना रहेगा | जन -साधारण सरकार पक्ष का विरोध करता दृश्य होगा | विपक्ष की एकता भी समय -समय पर भंग होती रहेगी | भारतीय उपमहाद्वीप में एक लम्बे समय से चलने वाले युद्ध का आगमन होगा | अप्रत्याशित रक्तपात हो सकता है | भारतीय सीमाओं पर शत्रु सेना भयंकर अस्त्र गर्जना कर सकती है | घरेलु उपयोग की वस्तुओं में तेजी दिखाई देगी |
---संवत आरम्भ में मंगल +राहु युति करेंगें और अप्रैल -2026 में मंगल +शनि और मंगल -नेप्च्यून का ग्रह -युद्ध होगा | काश्मीर और उत्तर भारत में युद्ध भय बना रहेगा | अफगानिस्तान के काबुल और कंधार में भी हिंसक जयलायें भड़केगी | जून -जुलाई -2026 में सत्ता पक्ष के लिए अनेक कठिनाईयां प्रस्तुत होगी | न्यायपालिका और सरकार पक्ष में विरोधाभास उत्पन्न होगा | जुलाई के अंतिम सप्ताह में अराजकता एवं मजहबी -हिंसा के योगायोग प्रस्तुत होंगें | देश -विदेश की राजनीति एकाएक बदलने लगेगी | -22 /01 /2027 से 02 /02 /2027 तक के समय में स्वर्ण के भावों में हलचल देखि जायेगी | 20 /02 /2027 से 12 /03 /2027 तक गुरु +बुध और मंगल के योगायोग के कारण विश्व व्यापार में हलचल देखी जाएगी | यह समय विश्व शान्ति के लिए भी अशुभ है | 10 /11 /2026 से 10 /03 /2027 तक मंगल -शनि के योगायोग के कारण युधभय ,प्राकृतिक आपदाओं एवं दर्घटनाओं के कारण अशुभ समाचार आते रहेंगें | विश्व राजनेताओं में परस्पर विरोधाभास उत्पन्न होगें |
-कुछ विशेष -----समाज में हमेशा तीनों मूल तत्व होते हैं | अप्राकृतिक रूप से सबको एक स्तर पर नहीं रखा जा सकता है | प्रकृति में विभिन्नता ही उसका नैसर्गिक सौंदर्य है | अप्राकृतिक रूप से विभिन्नता -वैभिन्य को समानता में लाना दुराग्रह का कृत्य होता है | प्रपंची शकुनि की कुटिल नीति पर चलने वाली राज -व्यवस्था का लगातार एक छत्र साम्राज्य बनाये रखने की --अभिलाषा ज्ञान मई कोष -से मनोमय भी वर्तमान शासकीय व्यवस्था में हो सकता है | --भवदीय निवेदक --खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ --2027 की समस्त बातों को जानने हेतु -इस लिंक पर पधारें --https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut
