आज आत्मकथा में अपने अनुभव पर कुछ कहना चाहता हूँ | हमने 55 वर्ष के होने पर अपने जीवन में तीन जन्म -कुण्डली को देखने पर आश्चर्य चकित रहा | --अस्तु --प्रथम कुण्डली जब हम केवल 20 वर्ष के थे स्थान -प्रह्लाद नगर मेरठ अपने चचेरे मामा के पास रहते थे --वो ज्योतिषी थे हम वैदिक तो थे ही ज्योतिष गणित मजबूत था पर फलित का अनुभव कम था --हम दोनों का सम्बन्ध मामा -भांजा का तो था ही किन्तु मित्र का भी था अतः यह निर्णय हुआ वेद हम पढायेंगें और फलित वो हमें सिखाएंगें | यह सत्संग का समय केवल एक वर्ष का रहा -उसके बाद हम मुम्बई पढ़ने चले गए --मेरे मामा के पास दो कुण्डलिया आयी -दोनों का सम्बन्ध भाई -बहिन का था -किन्तु में प्रेम था -एक पण्डित के लिए यह कहना बहुत ही कठिंन था किन्तु जब मामाने यह प्रेम की बात कही उन दोनों ने स्वीकार कर लिया --यह ज्योतिष के विस्वास को सबसे पहले मुझे बढ़ाया और मुझे लगा ज्योतिष के द्वारा बहुत कुछ जाना जा सकता है | ---दूसरी घटना मेरठ किशनपुरी की है --जब हम 30 वर्ष के हुए | एक यजमान मित्र मिले --जिनकी कुण्डली में सूर्य और चन्द्रमा दोनों नीच के एक मातृ क्षेत्र चंद्र तो दूसरा सूर्य पिता और कर्मक्षेत्र में --इसका अर्थ जानने के बाद भी उनसे मेरा सम्बन्ध बहुत दिनों तक रहा और मैं तलाश करता रहा --जब ऐसा योग कुण्डली में है तो दिखता क्यों नहीं है | उनसे बहुत ही घनिष्ठता थी उठना -बैठना सबकुछ एकसाथ था | जब यह अनुभव हुआ नीचता का प्रभाव का -तबतक बहुत कुछ खोने के बाद भी बहुत बड़ी हानि से बच गया फिर हमने दूरी बनाली | --तीसरा -उदहारण मेरठ शारदारोड का रहा -तब मैं 47 वर्ष का था -एक व्यक्ति की कुण्डली में -राहु और केतु का प्रभाव उलटा था और मेरी कुण्डली में सुलटा था --जब ऐसा योग हो तो मुझे दूरी बना लेनी चाहिए | किन्तु -दोस्ती उस व्यक्ति से पहले हुई और कुण्डली देखी बाद में परिणाम यह हुआ | इसका परिणाम देखने की इच्छा हुई -कईबार सोचता रहा देखने में भले मानुष है ,इसकी रक्षा तहे दिल से करनी चाहिए | दुनिया की सारी बदनामी अपने नाम किया ,मकान बचाया ,दुकान बचायी ,बाल -बच्चों को बचाया ,रोजगार खड़ा किया ,सभी रिश्तेदारों से शत्रुता की ,पूंजी बचायी ,देनदारों से बचाया ,दाम्पत्य सुख कैसे मिले ,समाज में सशक्त कैसे हो प्रयास किया | कोई भी व्यक्ति सुखी होना चाहे तो सबसे पहले खर्च को सीमित करे इस फार्मूला के तहत आगे बढ़ाया --जब सबकुछ हो गया तो सोचा --इस कुण्डली का जो योग है -उसका प्रभाव देखने के लिए इसकी परीक्षा लें --तो पता चला --हम सबसे बड़े इसके गुनाहगार हैं | इस बारे किसी और आलेख में जिक्र करेंगें | हमने अनुभव किया --वृथा न होहि देव् ऋषि वाणी --अर्थात ज्योतिष सच है --गलती हम जैसे अल्पज्ञानी ज्योतिषी करते हैं | --भवदीय निवेदक खगोलशास्त्री झा मेरठ -ज्योतिष की समस्त जानकारी के लिए इस लिंक पर पधारें khagolshastri.blogs
ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी -ज्योतिषी झा मेरठ
ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी -ज्योतिषी झा मेरठ 1 -कुण्डली मिलान का शुल्क 2200 सौ रूपये हैं | 2--हमसे बातचीत [परामर्श ] शुल्क है पांच सौ रूपये हैं | 3 -जन्म कुण्डली की जानकारी मौखिक और लिखित लेना चाहते हैं -तो शुल्क एग्ग्यारह सौ रूपये हैं | 4 -सम्पूर्ण जीवन का फलादेश लिखित चाहते हैं तो यह आपके घर तक पंहुचेगा शुल्क 11000 हैं | 5 -विदेशों में रहने वाले व्यक्ति ज्योतिष की किसी भी प्रकार की जानकारी करना चाहेगें तो शुल्क-2200 सौ हैं |, --6--- आजीवन सदसयता शुल्क -एक लाख रूपये | -- नाम -के एल झा ,स्टेट बैंक मेरठ, आई एफ एस सी कोड-SBIN0002321,A/c- -2000 5973259 पर हमें प्राप्त हो सकता है । आप हमें गूगल पे, पे फ़ोन ,भीम पे,पेटीएम पर भी धन भेज सकते हैं - 9897701636 इस नंबर पर |-- ॐ आपका - ज्योतिषी झा मेरठ, झंझारपुर और मुम्बई----ज्योतिष और कर्मकांड की अनन्त बातों को पढ़ने हेतु या सुनने के लिए प्रस्तुत लिंक पर पधारें -https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut
सोमवार, 18 अगस्त 2025
आत्मकथा में अपने अनुभव पर कुछ कहना चाहता हूँ -पढ़ें भाग -111 - ज्योतिषी झा मेरठ
आज आत्मकथा में अपने अनुभव पर कुछ कहना चाहता हूँ | हमने 55 वर्ष के होने पर अपने जीवन में तीन जन्म -कुण्डली को देखने पर आश्चर्य चकित रहा | --अस्तु --प्रथम कुण्डली जब हम केवल 20 वर्ष के थे स्थान -प्रह्लाद नगर मेरठ अपने चचेरे मामा के पास रहते थे --वो ज्योतिषी थे हम वैदिक तो थे ही ज्योतिष गणित मजबूत था पर फलित का अनुभव कम था --हम दोनों का सम्बन्ध मामा -भांजा का तो था ही किन्तु मित्र का भी था अतः यह निर्णय हुआ वेद हम पढायेंगें और फलित वो हमें सिखाएंगें | यह सत्संग का समय केवल एक वर्ष का रहा -उसके बाद हम मुम्बई पढ़ने चले गए --मेरे मामा के पास दो कुण्डलिया आयी -दोनों का सम्बन्ध भाई -बहिन का था -किन्तु में प्रेम था -एक पण्डित के लिए यह कहना बहुत ही कठिंन था किन्तु जब मामाने यह प्रेम की बात कही उन दोनों ने स्वीकार कर लिया --यह ज्योतिष के विस्वास को सबसे पहले मुझे बढ़ाया और मुझे लगा ज्योतिष के द्वारा बहुत कुछ जाना जा सकता है | ---दूसरी घटना मेरठ किशनपुरी की है --जब हम 30 वर्ष के हुए | एक यजमान मित्र मिले --जिनकी कुण्डली में सूर्य और चन्द्रमा दोनों नीच के एक मातृ क्षेत्र चंद्र तो दूसरा सूर्य पिता और कर्मक्षेत्र में --इसका अर्थ जानने के बाद भी उनसे मेरा सम्बन्ध बहुत दिनों तक रहा और मैं तलाश करता रहा --जब ऐसा योग कुण्डली में है तो दिखता क्यों नहीं है | उनसे बहुत ही घनिष्ठता थी उठना -बैठना सबकुछ एकसाथ था | जब यह अनुभव हुआ नीचता का प्रभाव का -तबतक बहुत कुछ खोने के बाद भी बहुत बड़ी हानि से बच गया फिर हमने दूरी बनाली | --तीसरा -उदहारण मेरठ शारदारोड का रहा -तब मैं 47 वर्ष का था -एक व्यक्ति की कुण्डली में -राहु और केतु का प्रभाव उलटा था और मेरी कुण्डली में सुलटा था --जब ऐसा योग हो तो मुझे दूरी बना लेनी चाहिए | किन्तु -दोस्ती उस व्यक्ति से पहले हुई और कुण्डली देखी बाद में परिणाम यह हुआ | इसका परिणाम देखने की इच्छा हुई -कईबार सोचता रहा देखने में भले मानुष है ,इसकी रक्षा तहे दिल से करनी चाहिए | दुनिया की सारी बदनामी अपने नाम किया ,मकान बचाया ,दुकान बचायी ,बाल -बच्चों को बचाया ,रोजगार खड़ा किया ,सभी रिश्तेदारों से शत्रुता की ,पूंजी बचायी ,देनदारों से बचाया ,दाम्पत्य सुख कैसे मिले ,समाज में सशक्त कैसे हो प्रयास किया | कोई भी व्यक्ति सुखी होना चाहे तो सबसे पहले खर्च को सीमित करे इस फार्मूला के तहत आगे बढ़ाया --जब सबकुछ हो गया तो सोचा --इस कुण्डली का जो योग है -उसका प्रभाव देखने के लिए इसकी परीक्षा लें --तो पता चला --हम सबसे बड़े इसके गुनाहगार हैं | इस बारे किसी और आलेख में जिक्र करेंगें | हमने अनुभव किया --वृथा न होहि देव् ऋषि वाणी --अर्थात ज्योतिष सच है --गलती हम जैसे अल्पज्ञानी ज्योतिषी करते हैं | --भवदीय निवेदक खगोलशास्त्री झा मेरठ -ज्योतिष की समस्त जानकारी के लिए इस लिंक पर पधारें khagolshastri.blogs
आत्मकथा क्यों लिखी या बोली सुनें -ज्योतिषी झा मेरठ
दोस्तों आत्मकथा एक सोपान हैं | प्रथम सोपान एक से तैतीस भाग तक ,दूसरा सोपान तैतीस भाग से बानवें भाग तक और अन्तिम सोपान बानवें भाग से अन्त तक -इसके बारे में कुछ कहना चाहता हूँ सुनें --आपकी राशि पर लिखी हुई बातें मिलती है कि नहीं परखकर देखें -
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खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ
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