जन्मकुण्डली का दशवां घर व्यक्ति के कर्मक्षेत्र और पिता दोनों पर प्रकाश डालता है | --मेरी कुण्डली का दशवां घर उत्तम है | इस घर की राशि वृष है -इसका स्वामी शुक्र -बुध के साथ दूसरे घर में विराजमान है --वैसे शुक्र नीच का है किन्तु बुध उच्च का अतः --शुक्र का नीच होना बुध की वजह से समाप्त हो गया | दशवें घर में चन्द्रमा उच्च का है | मेरी कुण्डली में लग्नेश ,त्रिकोणेश के साथ केंद्र में अकेला चद्र उच्च का होकर मुझे बहुत ही मजबूत बनाया है | धनेश बुध +शुक्र की युति ने मेरे जीवन में चार चाँद लगा दिए | जब जन्म हुआ तो राजयोग चन्द्रमा की दशा में हुआ --किन्तु इसकी अवधि के ढाई वर्ष थी अतः कम समय का राजयोग रहा | इसके बाद मंगल की अवधि भी कम रही - जब हम 10 वर्ष के हुए तो राहु की दशा शुरू हुई जो 28 वर्ष के जब हम हुए तब तक रही | यह राहु की दशा -सभी उत्तम ग्रहों पर भारी रही --शिक्षा ,दीक्षा ,नौकरी ,विवाह ,संतान ,सभी क्षेत्रों में मुझे बहुत संघर्ष रहा | केवल एक चीज बढ़िया रही -शिक्षा चलती रही --विवाह और पुत्री होने के बाद भी बहुत उत्तम शिक्षा मिली | इस शिक्षा का लाभ कभी नहीं मिला | इस शिक्षा की वजह से आज मैं सशक्त तो हूँ किन्तु कर्मक्षेत्र आज भी प्रभु के सहारे है | अपने जीवन में शिक्षा हो या जरुरत की चीजें --खुद अर्जित की किसी ने सहता नहीं की | एक दौर ऐसा आया -शिक्षा का विरोधी पिता माता के साथ पतनी भी बन गयी | किन्तु जब हम -28 वर्ष के हुए --साथ ही फिर से उत्तम दशा शुरू हुई तो --शिक्षा भी चलने लगी और कर्मक्षेत्र भी मजबूत हो गया | अपने जीवन में जब यह अनुभव हुआ ईस्वर ही सबकुछ हैं -उनकी शरण में रहो तो प्रभु ने मुझे दोनों हाथों से उठाया | हमें जो शिक्षा मिली उससे कभी धन ज्यादा नहीं मिला | मुझे शिक्षा में जितनी मेहनत करनी पड़ी उतना कमाने में श्रम नहीं करना पड़ा | मुझे ज्योतिष विद्या या संगीत से या पढ़ाई से कोई धन नहीं मिला | मुझे अपने जीवन में ज्यादातर समय निरर्थक लगा | मुझे धन पुरस्कार स्वरुप मिला साथ ही यह व्यवस्था स्वयं भोले नाथ ने की | मेरा गुजारा कैसे चलता है --आज तक पता नहीं चला | जब भी धन की जरुरत होती है --भोले नाथ से कहा वो जरुरत से ज्यादा दे दिया करते हैं | मुझे कईबार यह अनुभव हुआ मैं कुछ नहीं कर सकता हूँ --अपने आपको शिव को समर्पित कर दिया --उन्हौनें जरुरत से ज्यादा दे दिए | मेरे पास सरस्वती ज्यादा है --किन्तु लोग मुझे धन से ज्यादा जानते हैं | माता -पिता ,परिजन सभी धन से मुझे जानते हैं | जो मेरे यजमान बनते हैं या होते हैं --उन्हौनें हमारी सरस्वती को नहीं परख पाए --बल्कि धन से मुझे तौला है ---इस बात का मुझे बहु कष्ट होता है | मैं अपने समस्त परिजनों से दिल से प्रेम करता हूँ --किन्तु --प्रत्यक्ष नफ़रत का स्वरूर रखता हूँ --अतः व्यक्तिगत मैं किसी को शत्रु नहीं समझता --पर सभी को लगता है मैं अहंकारी हूँ | अंत में अपने कर्मक्षेत्र के बारे में इतना कह सकता हूँ ---अनायास विशेष धन प्राप्ति का राजयोग है --सो कोई न कोई धन रूपी पुरस्कार देता रहता है --जिसे हम खुद नहीं जानते होते हैं | अपने पिता से मैं बहुत प्रेम करता हूँ --ईस्वर और उनमें मुझे कोई अन्तर नहीं दिखा है --पर यह प्रत्यक्ष देखने पर नहीं लगता --क्योंकि दोनों में कभी बनी नहीं | कर्मक्षेत्र में मेरी सोच है --जब गारंटी ज्योतिष या कर्मकाण्ड का यजमान महत्व देते हैं तो फिर --मुद्रा को सबसे ऊपर कर दो --इससे यह फायदा होगा --शांति से भजन करोगे अन्यथा निरंतर लोग परेशान करेंगें | ---अगले भाग में मेरी कुण्डली का एकादश घर पर चर्चा करेंगें ---भवदीय निवेदक खगोलशास्त्री झा मेरठ -ज्योतिष की समस्त जानकारी के लिए इस लिंक पर पधारें -- - https://khagolshastri.blogspot.com/
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ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी -ज्योतिषी झा मेरठ 1 -कुण्डली मिलान का शुल्क 2200 सौ रूपये हैं | 2--हमसे बातचीत [परामर्श ] शुल्क है पांच सौ रूपये हैं | 3 -जन्म कुण्डली की जानकारी मौखिक और लिखित लेना चाहते हैं -तो शुल्क एग्ग्यारह सौ रूपये हैं | 4 -सम्पूर्ण जीवन का फलादेश लिखित चाहते हैं तो यह आपके घर तक पंहुचेगा शुल्क 11000 हैं | 5 -विदेशों में रहने वाले व्यक्ति ज्योतिष की किसी भी प्रकार की जानकारी करना चाहेगें तो शुल्क-2200 सौ हैं |, --6--- आजीवन सदसयता शुल्क -एक लाख रूपये | -- नाम -के एल झा ,स्टेट बैंक मेरठ, आई एफ एस सी कोड-SBIN0002321,A/c- -2000 5973259 पर हमें प्राप्त हो सकता है । आप हमें गूगल पे, पे फ़ोन ,भीम पे,पेटीएम पर भी धन भेज सकते हैं - 9897701636 इस नंबर पर |-- ॐ आपका - ज्योतिषी झा मेरठ, झंझारपुर और मुम्बई----ज्योतिष और कर्मकांड की अनन्त बातों को पढ़ने हेतु या सुनने के लिए प्रस्तुत लिंक पर पधारें -https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut
बुधवार, 19 नवंबर 2025
मेरी कुण्डली का दशवां घर आत्मकथा पढ़ें -भाग -124 - ज्योतिषी झा मेरठ
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आत्मकथा क्यों लिखी या बोली सुनें -ज्योतिषी झा मेरठ
दोस्तों आत्मकथा एक सोपान हैं | प्रथम सोपान एक से तैतीस भाग तक ,दूसरा सोपान तैतीस भाग से बानवें भाग तक और अन्तिम सोपान बानवें भाग से अन्त तक -इसके बारे में कुछ कहना चाहता हूँ सुनें --आपकी राशि पर लिखी हुई बातें मिलती है कि नहीं परखकर देखें -
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