ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी -ज्योतिषी झा मेरठ
ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी -ज्योतिषी झा मेरठ 1 -कुण्डली मिलान का शुल्क 2200 सौ रूपये हैं | 2--हमसे बातचीत [परामर्श ] शुल्क है पांच सौ रूपये हैं | 3 -जन्म कुण्डली की जानकारी मौखिक और लिखित लेना चाहते हैं -तो शुल्क एग्ग्यारह सौ रूपये हैं | 4 -सम्पूर्ण जीवन का फलादेश लिखित चाहते हैं तो यह आपके घर तक पंहुचेगा शुल्क 11000 हैं | 5 -विदेशों में रहने वाले व्यक्ति ज्योतिष की किसी भी प्रकार की जानकारी करना चाहेगें तो शुल्क-2200 सौ हैं |, --6--- आजीवन सदसयता शुल्क -एक लाख रूपये | -- नाम -के एल झा ,स्टेट बैंक मेरठ, आई एफ एस सी कोड-SBIN0002321,A/c- -2000 5973259 पर हमें प्राप्त हो सकता है । आप हमें गूगल पे, पे फ़ोन ,भीम पे,पेटीएम पर भी धन भेज सकते हैं - 9897701636 इस नंबर पर |-- ॐ आपका - ज्योतिषी झा मेरठ, झंझारपुर और मुम्बई----ज्योतिष और कर्मकांड की अनन्त बातों को पढ़ने हेतु या सुनने के लिए प्रस्तुत लिंक पर पधारें -https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut
शनिवार, 15 जून 2024
मेरी आत्मकथा पढ़ें भाग -97 -ज्योतिषी झा मेरठ
व्यक्ति के जीवन में कई पड़ाव आते हैं | वहां पहुँचने से पहले आशा होती है आगे ऐसा करेंगें ,वैसा करेंगें --जो नहीं कर सके उसे पाने की कोशिश करेंगें --पर ये बातें स्वप्न जैसी होतीं हैं ---खासकर हमने यही अहसास किया है | मेरा पहला परिवार बाल्यकाल में माता पिता ,तीन भाई और एक बहिन से जुड़ा था | राजयोग से दरिद्र योग केवल जब हम 10 वर्ष के हुए तभी प्राप्त हुआ -पर सहमति एक थी | भले ही अनन्त दुःख थे किन्तु प्रेम अनमोल था | माता पिता का अनुपम स्नेह था ,दीदी की ममतामयि दया की छत्र छाया में निरंतर रहता था | अनुजों के संग बाहुबली था | छत नहीं थी पर हम खुश थे ,वस्त्र नहीं थे फिर भी खुश थे ,पेट में दाना नहीं थे पर स्वर्ग में थे | सबसे पहले दीदी की शादी हुई -मेरी टोली में से एक सदस्य कम हो गया | फिर गरीबी थी पिता एक आश्रम में दे आये -उस टोली से दूसरा सदस्य गायब हो गया | एक अनुज को सर्प दंश के कारण मृत्यु हो गयी --एक और सदस्य कम हो गया | एक और अनुज रोजी -रोटी की तलाश में में मेरठ आ गया --उस टोली -परिवार में दो सदस्य बचे -माता पिता जिनपर कोई वजन नहीं था | जब वजन कम हो तो व्यक्ति की तरक्की होती है --पर विवेक नहीं हो तो एक क्षेत्र मजबूत होता है तो दूसरा क्षेत्र कमजोर स्वतः ही होने वाला होता है --इससे बचने के लिए ईस्वर की कृपा और विवेक का सदुपयोग करना चाहिए | आज के समय में किसी भी व्यक्ति को पहले धन चाहिए -हर व्यक्ति धन के क्षेत्र में आज मजबूत तो होता है पर बहुत कुछ खो देता है --जिसकी वो परवाह नहीं करता | मेरे माता पिता धनवान तो हुए -पर विवेक का प्रयोग नहीं करके राजनीति -छल -कपट का सहारा लिए --जिसकी वजह से धन ही विवाद का कारण बना | धन की वजह से बड़े पुत्र को खो दिया ,फिर अनुज को भी खो दिये | एक दिन धन माँ के हाथों में चला गया -अन्न -दवाई के बिना प्राण चले गए -कोई साथ नहीं दिया | माँ का धन अनुज ने समेट लिया --शून्य बनाकर दर -दर भटकने के लिए छोड़ दिया | जिन परिजनों ने यह अविवेक बनने की सलाह दी और जिनको सत्य मानकर अमल किया --वही मृत्यु का पाश बन गया | ऐसी स्थिति में महा भारत अपने सामने घर में ही शुरू हो जाता है | --क्योंकि जो मेरा पहला परिवार माता पिता भाई -बहिन थे --उससे हम सभी आगे बढ़ चुके थे --हमारा परिवार -पतनी ,और बच्चे थे -बाद में माता पिता या परिजन थे | ऐसे ही अनुज के बच्चे पहले थे ,ऐसे ही दीदी के बच्चे पहले अपने थे --कभी माता पिता हमारे थे अब हम खुद माता पिता हो चुके थे | -मेरे माता पिता ईस्वर की आराधना तो बहुत करते थे --पर अज्ञानी थे सलाहकार भी अज्ञानी थे इसलिए समय के साथ चलना नहीं सिख पाये | -केवल मैं यहाँ यही कहना चाहता हूँ --अगर जीवन में सुखी होना चाहते हैं --तो ईस्वर की आराधना अवश्य करें पर अविवेकी कदापि न बनें ,वही निर्णय लें जो शास्त्र कहते हैं ,जो आपका विवेक मन कहता है --जिसमें भले ही दुःख हो पर सत्य पर आधारित हो --तभी एक परिवार से निकलकर दूसरे परिवार का सुख लिया जा सकता है --अन्यथा धन तो होगा एकता नहीं होगी ,संगठन नहीं होगा ,सुखद अनुभूति नहीं होगी | आगे की चर्चा अगले भाग में करेंगें | --भवदीय निवेदक खगोलशास्त्री झा मेरठ --जीवनी की तमाम बातों को पढ़ने हेतु इस ब्लॉकपोस्ट पर पधारें ---khagolshastri.blogspot.com
आत्मकथा क्यों लिखी या बोली सुनें -ज्योतिषी झा मेरठ
दोस्तों आत्मकथा एक सोपान हैं | प्रथम सोपान एक से तैतीस भाग तक ,दूसरा सोपान तैतीस भाग से बानवें भाग तक और अन्तिम सोपान बानवें भाग से अन्त तक -इसके बारे में कुछ कहना चाहता हूँ सुनें --आपकी राशि पर लिखी हुई बातें मिलती है कि नहीं परखकर देखें -
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