ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी -ज्योतिषी झा मेरठ
ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी -ज्योतिषी झा मेरठ 1 -कुण्डली मिलान का शुल्क 2200 सौ रूपये हैं | 2--हमसे बातचीत [परामर्श ] शुल्क है पांच सौ रूपये हैं | 3 -जन्म कुण्डली की जानकारी मौखिक और लिखित लेना चाहते हैं -तो शुल्क एग्ग्यारह सौ रूपये हैं | 4 -सम्पूर्ण जीवन का फलादेश लिखित चाहते हैं तो यह आपके घर तक पंहुचेगा शुल्क 11000 हैं | 5 -विदेशों में रहने वाले व्यक्ति ज्योतिष की किसी भी प्रकार की जानकारी करना चाहेगें तो शुल्क-2200 सौ हैं |, --6--- आजीवन सदसयता शुल्क -एक लाख रूपये | -- नाम -के एल झा ,स्टेट बैंक मेरठ, आई एफ एस सी कोड-SBIN0002321,A/c- -2000 5973259 पर हमें प्राप्त हो सकता है । आप हमें गूगल पे, पे फ़ोन ,भीम पे,पेटीएम पर भी धन भेज सकते हैं - 9897701636 इस नंबर पर |-- ॐ आपका - ज्योतिषी झा मेरठ, झंझारपुर और मुम्बई----ज्योतिष और कर्मकांड की अनन्त बातों को पढ़ने हेतु या सुनने के लिए प्रस्तुत लिंक पर पधारें -https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut
गुरुवार, 21 सितंबर 2023
मेरा" कल आज और कल -पढ़ें -भाग -3-ज्योतिषी झा मेरठ
मेरे ऊपर राहु की महाशा 1980 से प्रारम्भ हुई ----ध्यान दें |-!मेरा बाल्यकाल का पूर्वार्ध जितना निरस लगेगा उत्तरार्ध उतना ही सरस दिखेगा -हो सकता है आप श्रोताओं के मन में मेरे प्रति कुभाव उत्पन्न होने लगे किन्तु संसार का कोई ग्रन्थ हो ,जीवन लीला हो या कथा -सभी में आठों रसों का प्रयोग होता है | तभी कथा समझ में आती है | -----अस्तु --मेरी कुण्डली में राहु का सप्तम भाव में होने से वैवाहिक सुख और मानसिक विचारधारा पर पूर्ण प्रभाव था साथ ही लग्न में सूर्य ,मंगल और केतु होने से जैसे मानो अग्नि में घी का डालने पर ज्वाला होती है वही होना था | --ब्राहण का जनेऊ संस्कार 13 वर्षों तक हो जाना चाहिए | मेरे माता पिताने मेरा जनेऊ संस्कार बड़े धूम -धाम से कराया | अनुज के साथ हमारे जनेऊ संस्कार हुए | इसके बाद 1981 में श्री महर्षी महेष योगी की संस्था में हमें सन्ध्या -गायत्री और सदाचार की शिक्षा मिली | केवल तीन मास गांव में शिक्षा लेने के बाद इन्हीं की दूसरी संस्था पातेपुर जिला -वैशाली {बिहार }हम पढ़ने चले गए | पिता के धन के बिना -हमें शिक्षा मिली ,साथ ही सभी बच्चों का भोजन ,रहन सहन की सारी व्यवस्था इन्हीं की ओर से थी | पर राहुदेव की कृपा से केवल तीन मास पढ़ने के बाद गांव आ गए क्योंकि वहां से भोपाल जाना था | हमारे साथ जितने भी छात्र थे सभी वापस अपने -अपने गांव चले गए | इसी बीच दीदी की शादी हुई पर हम गांव में नहीं थे कैसे हुई पत्ता नहीं चला | जिला -वैशाली से वापस आते ही दीदी की शादी में जमीन बिक गयी ,पिताजी की दुकान की पूंजीं समाप्त हो गई और पिताजी को नौक़री हेतु कलकत्ता जाना पड़ा | घर में चोरी हो गयी | हमलोग अन्न ,वस्त्र ,और रोजगार से विहीन हो गए | घर में खाने को कुछ नहीं ,पिताजी के पास व्यवसाय का साधन नहीं, फिर पिताजी ने लोन लिया जो धन तो मिला नहीं बदले में जमीन के सारे कागजात बैंक में जो लोन का चैक मिला उसपर हस्ताक्षर करबाकार धन ताऊ और बैंक के मैनेजर ने ले लिए | बदले में पिताजी से दोनों ने कहा चैक रिजेक्ट हो गया और हमने फाड़ दिया | फिर भी पिताजीने जैसे -तैसे करके व्यापार शुरू किया | मेरे जीजा मेर घर पर रहने लगे यानि उनको पढ़ाने की जिम्मेदारी हमारे पिताजी की थी तभी शादी दीदी की हुई थी | जीजा को भोजन बढियाँ मिलता था हमलोग किसी तरह जीते थे | एकदिन मुझको क्रोध आया और जीजा के सारे कपड़ें कीचड़ में डाल दिए साथ ही हमने कहा आप यहाँ नहीं रहोगे चाहे जो हो जायेगा | सबका दुश्मन मैं बना पर जीजा को भगा दिया | अब हमारे घर में कुछ भी नहीं था जीवन यापन करने हेतु | मेरी माँ और दीदीने पत्ता नहीं कितने दिनों तक भोजन नहीं किया इधर -उधर करके हम तो कुछ खा लेते या माँ खिला देती पर माँ का पत्ता नहीं | 1983 तक इसी तरह घर चलता रहा | जब मुझको भूख सहन नहीं होती तो घर के सारे मिटटी के बर्तनों को तोडना ,गाली जैसे शब्दों का प्रयोग करना ये आदत थी | ---आगे की कथा कल बताऊंगा |--दोस्तों आप भी अपनी -अपनी राशि के स्वभाव और प्रभाव को पढ़ना चाहते हैं या आपकी राशि पर लिखी हुई बातें मिलतीं हैं कि नहीं परखना चाहते हैं तो इस पेज पर पधारकर पखकर देखें -https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut
आत्मकथा क्यों लिखी या बोली सुनें -ज्योतिषी झा मेरठ
दोस्तों आत्मकथा एक सोपान हैं | प्रथम सोपान एक से तैतीस भाग तक ,दूसरा सोपान तैतीस भाग से बानवें भाग तक और अन्तिम सोपान बानवें भाग से अन्त तक -इसके बारे में कुछ कहना चाहता हूँ सुनें --आपकी राशि पर लिखी हुई बातें मिलती है कि नहीं परखकर देखें -
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