ॐ संवत -2083 का आगमन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा अर्थात -दिनांक -19 /03 /2026 को मीन राशि के चंद्र और उत्तर भाद्रपदा नक्षत्र में होगा | नव वर्ष प्रवेश के समय दिल्ली में मीन लग्न उदित है | लग्नेश गुरु शत्रु राशि में स्थित हैं ,और अष्टम ,दशम और द्वादश भाव पर दृष्टिपात कर रहे हैं | गुरु ही वर्ष का राजा सस्येश,नीरसेश और धनेश भी हैं | लग्न में शनि ,चंद्र ,सूर्य और शुक्र है | शनि की दृष्टि दशम भाव ,सप्तम भाव और तृतीय भाव पर है | शुक्र अपनी उच्च राशि से सप्तम भाव को देख रहा है | ---भारत के सम्बन्ध पड़ौसी देशों के साथ तनाव पूर्ण ही बने रहेंगें ,सम्बन्ध सुधारने के लिए असफल प्रयास होते रहेंगें | कुछ मित्र देशों के साथ भी सम्बन्ध तनाव पूर्ण हो सकते हैं |
---यातायात और दूरसंचार के क्षेत्रों में व्यवसायिक अथवा कूटनैतिक समस्या उत्पन्न होगी | इन क्षेत्रों से सम्बंधित न्याय और आंतरिक नियमों में फेरबदल अथवा संशोधन होगा | मार्च से मई -2026 सरकार के लिए विभिन्न कारणों से चिंताएं बनी रहेगी | मई और जून -2026 में शत्रु देशों द्वारा रचित षड्यंत्र के कारण जन धन की हानि भी संभव है | जुलाई --2026 में सरकार का मनोबल बढ़ेगा | अर्थ व्यवस्था में कुछ नवीन आंशिक शुभ लक्षण उत्पन्न होंगें |
--वर्षा ऋतु में मौसम का उग्र रूप प्रबल होगा | उत्तर और पश्चिम उपमहाद्वीप में अनियमित वर्षा कारण जनधन की हानि के योग पुनः उतपन्न हो रहे हैं | अन्तर्राष्ट्रीय संबंधों के कारण यातायात ,दूरसंचार और राष्ट्रीय कोष पर दवाब अनुभव होगा | पर्यावरण और प्रकृति के अनुकूल नीतियां बनाकर और कर्म कर इन अशुभ फलों को पर्याप्त सीमा तक कम किया जा सकता है | ---भारत सरकार को उक्त दिशा में क्रियाशील होना हितकर होगा | सितम्बर के अंत और अक्टूबर -2026 -के आरम्भ में सीमाओं पर तनाव संभव है | पड़ौसी देशों के साथ सम्बन्ध पुनः खटास में पड़ सकते हैं | अक्टूबर और नवम्बर -2026 में शुभ फलों की प्राप्ति होगी | शत्रु दमन संभव है | भारत की नीतियों में उग्रता परिलक्षित होगी | दिसम्बर -2026 और जनवरी --2027 में विपक्ष और पड़ौसी देशों में कुछ गुप्त दुरभि संधि पनपने का आयोजन बन सकता है | यह ज्योतिषीय संकेत है | फरवरी -मार्च -2027 विपक्ष को धक्का लगेगा |
--स्वतंत्र भारत में तथाकथित धर्म -निरपेक्षता का वस्तु -परक मूल्याङ्कन वर्तमान सन्दर्भ में परमावश्यक है | राम युग में जिस प्रकार कालनेमि राम भक्त बनकर श्री हनुमानजी की सेवा में बाधा डाल रहा था उसी प्रकार उक्त पंथ निरपेक्षता वास्तव में हिन्दू विरोधी -खल -नीति - है | यह नीति एक ओर जनता के पैसों पर ,इस्लामिक धर्म प्रचार की संस्थाओं जामिया मिलिया, ए एम् यू का समर्थन करती आ रही है | दूसरी ओर बहुत समय तक हज यात्रा का आर्थिक भार भी जनता पर डाला जाता रहा है | यह कैसी विडम्बना पूर्ण पंथ निरपेक्षता है |
---आने वाले समय में स्वतंत्र भारत की मंगल की महादशा में भारतीय जनता और नेता जागरूक होकर इस खल पूर्ण कालनेमि ,हिन्दू विरोधी नीति पर पुनः विचार कर --इसे इतिहास के कूड़ेदान में विलीन करें --यही राष्ट्रहित में होगा ,और मंगल -आर्य -का शुभफल प्रदान करेगा | --भवदीय निवेदक --खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ --2027 की समस्त बातों को जानने हेतु -इस लिंक पर पधारें --https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut


















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