ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी -ज्योतिषी झा मेरठ

ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी -ज्योतिषी झा मेरठ
ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी -ज्योतिषी झा मेरठ 1 -कुण्डली मिलान का शुल्क 2200 सौ रूपये हैं | 2--हमसे बातचीत [परामर्श ] शुल्क है पांच सौ रूपये हैं | 3 -जन्म कुण्डली की जानकारी मौखिक और लिखित लेना चाहते हैं -तो शुल्क एग्ग्यारह सौ रूपये हैं | 4 -सम्पूर्ण जीवन का फलादेश लिखित चाहते हैं तो यह आपके घर तक पंहुचेगा शुल्क 11000 हैं | 5 -विदेशों में रहने वाले व्यक्ति ज्योतिष की किसी भी प्रकार की जानकारी करना चाहेगें तो शुल्क-2200 सौ हैं |, --6--- आजीवन सदसयता शुल्क -एक लाख रूपये | -- नाम -के एल झा ,स्टेट बैंक मेरठ, आई एफ एस सी कोड-SBIN0002321,A/c- -2000 5973259 पर हमें प्राप्त हो सकता है । आप हमें गूगल पे, पे फ़ोन ,भीम पे,पेटीएम पर भी धन भेज सकते हैं - 9897701636 इस नंबर पर |-- ॐ आपका - ज्योतिषी झा मेरठ, झंझारपुर और मुम्बई----ज्योतिष और कर्मकांड की अनन्त बातों को पढ़ने हेतु या सुनने के लिए प्रस्तुत लिंक पर पधारें -https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut

सोमवार, 26 जनवरी 2026

नूतन संवत -2083 -यानि -2026 +27 -भविष्यवाणी -पढ़ें -खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ

ॐ संवत -2083 का आगमन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा अर्थात -दिनांक -19 /03 /2026 को मीन राशि के चंद्र और उत्तर भाद्रपदा  नक्षत्र में होगा |  नव वर्ष प्रवेश के समय दिल्ली में मीन लग्न उदित है | लग्नेश गुरु शत्रु राशि में स्थित हैं ,और अष्टम ,दशम और द्वादश भाव पर दृष्टिपात कर रहे हैं | गुरु ही वर्ष का राजा सस्येश,नीरसेश और धनेश भी हैं | लग्न में शनि ,चंद्र ,सूर्य और शुक्र है | शनि की दृष्टि दशम भाव ,सप्तम भाव और तृतीय भाव पर है | शुक्र अपनी उच्च राशि से सप्तम भाव को देख रहा है | ---भारत के सम्बन्ध पड़ौसी देशों के साथ तनाव पूर्ण ही बने रहेंगें ,सम्बन्ध सुधारने के लिए असफल प्रयास होते रहेंगें | कुछ मित्र देशों के साथ भी सम्बन्ध तनाव पूर्ण हो सकते हैं | 

---यातायात और दूरसंचार के क्षेत्रों में व्यवसायिक अथवा कूटनैतिक समस्या उत्पन्न होगी | इन क्षेत्रों से सम्बंधित न्याय और आंतरिक नियमों में फेरबदल अथवा संशोधन होगा | मार्च से मई -2026 सरकार के लिए विभिन्न कारणों से चिंताएं बनी रहेगी | मई और जून -2026 में शत्रु देशों द्वारा रचित षड्यंत्र के कारण जन धन की हानि भी संभव है | जुलाई --2026 में सरकार का मनोबल बढ़ेगा | अर्थ व्यवस्था में कुछ नवीन आंशिक शुभ लक्षण उत्पन्न होंगें | 

--वर्षा ऋतु  में मौसम का उग्र रूप प्रबल होगा | उत्तर  और पश्चिम उपमहाद्वीप में अनियमित वर्षा  कारण जनधन की हानि के योग पुनः उतपन्न हो रहे हैं | अन्तर्राष्ट्रीय संबंधों के कारण यातायात ,दूरसंचार और राष्ट्रीय कोष पर दवाब अनुभव होगा | पर्यावरण और प्रकृति के अनुकूल नीतियां बनाकर और कर्म कर इन अशुभ फलों को पर्याप्त सीमा तक कम किया जा सकता है | ---भारत सरकार को उक्त दिशा में क्रियाशील होना हितकर होगा | सितम्बर के अंत और अक्टूबर -2026 -के आरम्भ में सीमाओं पर तनाव संभव है | पड़ौसी देशों के साथ सम्बन्ध पुनः खटास में पड़ सकते हैं | अक्टूबर और नवम्बर -2026 में शुभ फलों की प्राप्ति होगी | शत्रु दमन संभव है | भारत की नीतियों  में उग्रता परिलक्षित होगी | दिसम्बर -2026 और जनवरी --2027 में विपक्ष और पड़ौसी देशों में कुछ गुप्त दुरभि संधि पनपने का आयोजन बन सकता है | यह ज्योतिषीय संकेत है | फरवरी -मार्च -2027  विपक्ष को धक्का लगेगा | 

--स्वतंत्र भारत  में तथाकथित धर्म -निरपेक्षता का वस्तु -परक मूल्याङ्कन वर्तमान सन्दर्भ में परमावश्यक है | राम युग में जिस प्रकार कालनेमि राम भक्त बनकर श्री हनुमानजी की सेवा में बाधा डाल रहा था उसी प्रकार उक्त पंथ निरपेक्षता वास्तव में हिन्दू विरोधी -खल -नीति - है | यह नीति एक ओर जनता के पैसों पर ,इस्लामिक धर्म प्रचार की संस्थाओं  जामिया मिलिया, ए एम् यू  का समर्थन करती आ रही है | दूसरी ओर बहुत समय तक हज यात्रा का आर्थिक भार भी जनता पर डाला जाता रहा है | यह कैसी विडम्बना पूर्ण पंथ निरपेक्षता है | 

---आने वाले समय  में स्वतंत्र भारत की मंगल की महादशा में भारतीय जनता और नेता जागरूक होकर इस खल पूर्ण कालनेमि ,हिन्दू विरोधी नीति पर पुनः विचार कर --इसे इतिहास के कूड़ेदान में विलीन करें --यही राष्ट्रहित में होगा ,और मंगल -आर्य -का शुभफल प्रदान करेगा | --भवदीय निवेदक --खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ --2027 की समस्त बातों को जानने हेतु -इस लिंक पर पधारें --https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut



शनिवार, 24 जनवरी 2026

ज्योतिष की दृस्टि में संसार चक्र 2026+27 -पढ़ें -खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ

ॐ -वैशाख कृष्ण द्वादशी --दिनांक -14 /04 /2026  मंगलवार प्रातः -09 /31  पर सूर्यदेव मेष संक्रमण करेंगें | इस समय चंद्र कुम्भ राशि में स्थित है | लग्नेश शुक्र द्वादश भाव में सूर्य के साथ बैठा है | बुध पंचमेश होकर पंचम भाव को देख रहा है | नवमेश -दशमेश शनि एकादश भाव से लग्न पर ,पंचम भाव पर और अष्टम भाव पर एवं दशम भाव पर दृष्टि पात कर रहा है | मंगल सप्तम भाव का अधिपति है और छठे भाव को अष्टम दृस्टि से देख रहा है | राहु -केतु ,दशम -चतुर्थ भाव में बैठे हैं | चौथे भाव का अधिपति सूर्य छठे भाव पर दृस्टि डाल रहे हैं | शनि +गुरु और केतु अष्टम भाव पर दृष्टि डाल रहे हैं | बुध नीच का है | --उक्त समस्त ग्रहों के प्रभाव से यह संवत -2026 सरकार के लिए कठिन प्रतीत हो रहा है | भारत के सम्बन्ध  कुछ राष्ट्रों के साथ तनावपूर्ण होंगें | युद्ध ,पीड़ा ,प्राकृतिक प्रकोप और हिंसक गतिविधियों के कारण जनधन हानि के व्यापक योग है | अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के कारण सरकार पक्ष को घोर पीड़ा अनुभव होगी | उच्च राजनेताओं पर स्वास्थ संकट मंडरा सकता है | सत्ता पक्ष के लिए यह कठिन है | व्यवसायिक वातावरण में असमंजस्य और अनिश्चितता व्याप्त होगी | उक्त अनिश्चितता के लिए विपक्ष और जनसाधारण सत्ता पक्ष उत्तरदायी बतायेगा | 

---केंद्र सत्ता में परिवर्तन के योग पकट हो सकते हैं | शत्रु देशों के गुप्तचर तंत्रों के कारण विशेष पीड़ा अनुभव होगी | वर्ष भर मजहबी -हिंसा और आतंकवादी गतिविधियों का खतरा बना रहेगा | जन -साधारण सरकार पक्ष का विरोध करता दृश्य होगा | विपक्ष की एकता भी समय -समय पर भंग होती रहेगी | भारतीय उपमहाद्वीप में एक लम्बे समय से चलने वाले युद्ध का आगमन होगा | अप्रत्याशित रक्तपात हो सकता है | भारतीय सीमाओं पर शत्रु सेना भयंकर अस्त्र  गर्जना कर सकती है | घरेलु उपयोग की वस्तुओं में तेजी दिखाई देगी | 

---संवत आरम्भ में मंगल +राहु  युति  करेंगें और अप्रैल -2026 में मंगल +शनि और मंगल -नेप्च्यून का ग्रह -युद्ध होगा | काश्मीर और उत्तर भारत में युद्ध भय बना रहेगा | अफगानिस्तान के काबुल और कंधार में भी हिंसक जयलायें भड़केगी | जून -जुलाई -2026  में सत्ता पक्ष के लिए अनेक कठिनाईयां प्रस्तुत होगी | न्यायपालिका और सरकार पक्ष में विरोधाभास उत्पन्न होगा | जुलाई के अंतिम सप्ताह में अराजकता एवं मजहबी -हिंसा के योगायोग प्रस्तुत होंगें |  देश -विदेश की राजनीति एकाएक बदलने लगेगी | -22 /01 /2027 से 02 /02 /2027 तक के समय में स्वर्ण के भावों में हलचल देखि जायेगी | 20 /02 /2027 से 12 /03 /2027 तक गुरु +बुध और मंगल के योगायोग के कारण विश्व व्यापार में हलचल देखी जाएगी | यह समय विश्व शान्ति के लिए भी अशुभ है | 10 /11 /2026 से 10 /03 /2027 तक मंगल -शनि के योगायोग के कारण युधभय ,प्राकृतिक आपदाओं एवं दर्घटनाओं के कारण अशुभ समाचार आते रहेंगें | विश्व राजनेताओं में परस्पर विरोधाभास उत्पन्न होगें | 

-कुछ विशेष -----समाज में हमेशा तीनों मूल तत्व होते हैं | अप्राकृतिक रूप से सबको एक स्तर पर नहीं रखा जा सकता है | प्रकृति में विभिन्नता ही उसका नैसर्गिक सौंदर्य है | अप्राकृतिक रूप से विभिन्नता -वैभिन्य को समानता में लाना दुराग्रह का कृत्य होता है | प्रपंची शकुनि की कुटिल नीति पर चलने वाली राज -व्यवस्था का लगातार एक छत्र साम्राज्य बनाये रखने की --अभिलाषा ज्ञान मई कोष -से मनोमय भी वर्तमान शासकीय व्यवस्था में हो सकता है | --भवदीय निवेदक --खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ --2027 की समस्त बातों को जानने हेतु -इस लिंक पर पधारें --https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut



बुधवार, 21 जनवरी 2026

आत्मकथा एवं ज्योतिष किताब पूर्ण हो चुकी है --पढ़ें -खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ

ॐ --हमारे -पाठकगण -आपलोग हमारे साथ -2010 से आज -21 /01 /2026 है --जुड़े रहे -सबसे पहले आप सबको साधुवाद देना चाहते हैं | -जीवन निःस्वार्थ नहीं हो सकता है -यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव रहा है | हमने फिर भी धर्म सम्मत प्रयास किया है -कि कितना बचा जा सकता है | मेरा अनुभव है -ज्योतिष के जितने भी आचार्य हुए -जिनके संस्कृत के जितने भी ग्रन्थ हैं ==चाहे शीघ्रबोध ,शिशुबोध ,मुहूर्त चिंतामणि ,ताजिक नीलकण्ठी ,जतका भरणम ,जातक तत्त्वं ,सांख्यकारिका ,जैमिनी सूत्र --आदि --सभी ग्रन्थों के अपने -अपने मत रहे हैं --पर सबसे बड़ी विशेषता यह रही सभीने --संस्कृत भाषा  में लिखी हैं --इसका प्रथम अभिप्राय यह हुआ --सभी संस्कारों और संस्कृति को प्रमुखता दी है | आज हम सभी लोग भी ज्योतिषी करते हैं किन्तु --हमारे विचार और संस्कारों में अन्तर का एक प्रमुख कारण यह है --ज्योतिष  वही है पर संस्कार और संस्कृति एक जैसी नहीं है | हमने 15 वर्षों में यही दर्शाने की कोशिश की है | मेरे विचार से जो अच्छा लगे उसे स्वीकार करें ,जो अच्छा नहीं लगे उसे त्याग दें किन्तु उपहास न करें | --आत्मकथा में व्यक्तिगत बातों को दर्शाकर यह कोशिश की है -गलती सभी जगह होती है --कभी न कभी हर व्यक्ति अपने को ठीक करने की कोशिश अवश्य  करता है | --दूसरी किताब जो ज्योतिष की लिखी है --इसमें ज्योतिष का वास्तविक रूप में सार है --केवल -75 भागों में सभी बातों को समेटने की कोशिश की है | भले ही बहुत ग्रंथों को पढ़ने का मौका न मिले --किन्तु इन भागों को पढ़कर एक परिपक्व ज्योतिषी बना जा सकता है --जो संस्कृति और संस्कारों से भी बांधें रखेंगें | अब आगे जीविका सबको चाहिए --मुझे भी चाहिए --अतः अब केवल ज्योतिष की पाक्षिक भविष्यवाणी  के साथ -साथ --भविष्यवाणी के प्रमुख लेख ही लिखेंगें --जिससे मेरी जीविका चलती रहे | अपना विशेष समय -आराधना में बिताएंगें | ----ज्योतिष की भविष्यवाणी पढ़ने हेतु --यहाँ पधारें -- खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ

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सोमवार, 19 जनवरी 2026

देश -विदेशों में इस पक्ष -19 /01 /26 से 01 /02 /26 तक -क्या -क्या होगा --पढ़ें -ज्योतिषी झा मेरठ

ॐ श्रीसंवत -2082 -शाके -1947  माघ शुक्लपक्ष  तदनुसार  दिनांक -19 /01 /2026 से 01 /02 /2026 तक -भविष्यवाणी की बात करें --पहले एक प्रमाण देखें --कृष्ण पक्ष की तिथि बढे ,शुक्ल पक्ष घट जाय ,एक वस्तु  तो क्या घटे ,सभी वस्तु घट जाय "--अर्थात --उपयोगी वस्तुओं की कमी होने से बाजार का रुख नरम रहेगा | रोजमर्रा की चीजें अधिक महंगी होगी | --एक और प्रमाण देखें --मकरे च स्थिते भौमे घृत तेल महर्घता ---के अनुसार घी +तेल  में अधिक तेजी होगी | --एक और प्रमाण देखें --आगे पीछे बहुत ग्रह ,रवि राहु आगार ,राजनीति सह द्विन्द से ,होवे बहुत बिगार "---भाव --राजनैतिक पार्टियों  में परस्पर उठा -पटक के चलते किसी देस  अथवा प्रदेश में काफी क्षति होगी | रोजमर्रा की छीना झपटी ,तोड़फोड़ ,मारपीट  से जनता त्रस्त रहेगी | नेता मौज मस्ती करेंगें | ------तेजी मन्दी की बात करें तो --पक्षान्त बने भाव अंत में पलट जायेंगें | चल रहे साम्यक भाव निचे -ऊँचे होते रहेंगें | ----घी ,तेल ,मसूर ,अन्न ,मूंगफली ,चना ,चबेना ,मक्का ,नमकीन ,मिर्च -मसाला महंगें होंगें | ---आकाश लक्षण की बात करें तो --मौसम खराब चलेगा ,बादलचाल ,कहीं कम तो कहीं अधिक बूंदाबांदी होगी | बिजली ,गाज ,दुर्दिन होने से यातायात में बाधा एवं खेती में क्षति का कारण बनती है | नोट --राष्ट्रनायकों में झगड़ें विवाद क्षोभ का कारण बनेगा | --ज्योतिष की समस्त बातों को जानने हेतु --इस पेज पर पधारें --खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ

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शनिवार, 3 जनवरी 2026

इस पक्ष -क्या -क्या होगा -पढ़ें -04 /01 /26 से -18 /01 /26 -तक -ज्योतिषी झा मेरठ

 इस पक्ष  -क्या -क्या होगा -पढ़ें -04 /01 /26 से -18 /01 /26 -तक -ज्योतिषी झा मेरठ 


-ॐ -माघ कृष्णपक्ष  दिनांक -04 /01 /2026 से --18 /01 /2026 -तक  देश -विदेशों में होने वाली घटनाओं का जिक्र करें --एक प्रमाण देखें --"शनिवारा  यदा पंच जायन्ते रवि पंचकम ,महार्घं जायते धान्यं रोग शोकाकुला मही "--प्रस्तुत प्रमाण के के अनुसार --माघ कृष्ण पक्ष में अनाजों में तेजी होगी | प्रजाजनों में रोग -शोक -संताप बढ़ेंगें | अन्तर्राष्ट्रीय जगत में किसी प्रकार की नई हलचल होगी | राजनीति परिचर्चा पार्टी बेस  पर अंतर्द्वंद ,मारपीट ,तोड़फोड़ ,उठा -पटक में तब्दील होगी | -----एक और प्रमाण देखें --देव् गुरु के सामने जब चलते शुक्राचार ,धर्म विरोधी मर मिटें ,करते पापाचार "---- अर्थात --पक्ष के पूर्वार्ध में दंगे भड़क सकते हैं | मकर संक्रांति तक विरोधी ग्रह आमने -सामने चलेंगें | पंचग्रही  योग  का प्रभाव उत्तम नहीं रहेगा | ----अर्थात ---विरोधी ग्रह संयोग में रक्तरंजीत  धरा अकुलायेगी | अस्त्र -शस्त्र चलने लगते हैं | ----तेजी मंदी की बात करें तो --चालू भावों में उथल -पुथल होती रहेगी | पक्षांत में भाव पलट जायेंगें | --विशेष ---राजनीति के पट्टेबाज को दिक्कत होती है ,अथवा पदार्थों की कमी अखरती है | खाने -पीने की वस्तुयें न मिलने से छीना झपटी होगी | ----आकाश लक्षण की बात करें तो --जहाँ -तहाँ  बादलचाल ,मेघगर्जन ,बिजली ,गाद ,हिमपात ,उपलवृष्टि संभव है | --आपका --

खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ-- 
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शनिवार, 27 दिसंबर 2025

आत्मकथा सम्पूर्णम - पढ़ें -भाग -128 - ज्योतिषी झा मेरठ

 दोस्तों --आत्मकथा की शुरुआत -2017 में की थी -इसका अभिप्राय था -क्या जो हम उपदेश देते हैं -वो हम खुद निभाते हैं या नहीं | हमने अपनी कुण्डली से सभी बातों पर प्रकाश डालने की कोशिश की | हमने जो पढ़ा या सुना पहले उन बातों को लिखने का प्रयास किया | इसके बाद मुझे लगा -लोग दोषारोपण ज्यादा करते हैं --2010 में मेरा केवल एक ही उद्देश्य था -ज्योतिष और कर्मकाण्ड सम्बंधित सभी बातों को लिखें -इससे लिखना सिख जाऊंगा --क्योंकि जीवन भर केवल याद करना सिखाया -बड़े -बड़े ग्रंथों के मन्त्रों को याद  तो किये पर उसका भाव नहीं समझे न ही बोलने या लिखने की शुद्धःता थी | जब हम रेडियो स्टेशन गए तब अहसास हुआ --मैं एक अधूरा शास्त्री हूँ | दूसरी बात बड़े -बड़े यज्ञों को कराया --पर यह नहीं पता चला हम शुद्ध बोल रहे हैं या अशुद्ध --अतः हमने नेट की दुनिया में इन दोनों चीजों को सीखने की बहुत कोशिश की --इसके लिए ब्लॉक पर आलेख लिखते रहे --फ्री ज्योतिष सेवा देते रहे ---हमें थोड़ -बहुत  जो कुछ भी आया वो लोगों की देन है | जब इन दोनों क्षेत्रों में अनुभव हो गया तो --हम सोचने लगे अब क्या लिखें --तो जीवनी समझ में आयी | इस जीवनी को भी लिखने में बहुत समय लग गया | --अब मेरे पास कुछ नहीं है  जो कुछ था वो लिख चूका हूँ | अंत में यह कहना चाहते हैं --जिस प्रकार हर चीज का अंत होता है --उसी प्रकार शिष्य के आगे गुरु अधूरा हो जाते हैं ,पुत्र या पुत्री के आगे माता पिता अधूरा हो जाते हैं | साथ ही सभी माता पिता को चाहिए --संतान के आगे अपने को छोटा बना लें ,गुरुजनों को भी चाहिए -शिष्यों में इतना ज्ञान डाल  दें कि उनका ज्ञान शिष्यों के आगे अधूरा रहे ----संसार यही बात नहीं होती है --इसकी वजह से गुरु शिष्यों में  संतान से माता पिता के विचारों में मतभिन्नता रहती है | हमने आत्मकथा से यह अनुभव किया -मेरा ज्ञान सीमित था जो लिख चूका या कह चूका --अतः अगली जो पीढ़ी है --वो हमसे उत्तम रहेगी , उत्तम है | जीवन में सबका सम्मान तभी हो सकता है --जब व्यक्ति अपने आपको छोटा बना लें | जब नेट की दुनिया में 2 जी ,से 3 जी से 4 जी और अब --5 जी -----5 जी के आगे सभी छोटे हो गए ---इसी प्रकार --किसी से हम बढ़िया रहे कोई हमसे भी बढ़िया है --अतः -जब मुझ जैसा अज्ञानी व्यक्ति कुछ कर सकता है --तो आज के समय सभी हमसे बढ़िया संसाधन युक्त हैं --तो तो निश्चित ही हमसे बढ़िया होंगें | आज मुझे गर्व है --हमारी जो नई पीढ़ी आयी है --वो ज्योतिष और कर्मकाण्ड को हमसे बेहतर बनायेंगें --उनको मेरा आशीष है |  जो ज्योतिष के अलीख हमने लिखें हैं  वो इस तरह काम आयेंगें --जैसे कक्षा में किताबों को पढ़ते हैं --पर अपने मत से आगे बढ़ते हैं | मेरे विचार से सभी किताबों को पढ़नी चाहिए --जो अच्छा लगे उसे स्वीकार करना चाहिए -किन्तु --परन्तु नहीं करना चाहिए | अंत में एक ही निवेदन है --जितनी देर किसी की कमी निकालने में समय व्यतीत करेंगें उतनी देर में कुछ और खोज कर लेंगें --यही ज्ञानी जनों को सोचना चाहिए |  मुझे कईबार कई व्यक्ति से शत्रुता हुई -मन में कईबार यह आया -इसे नष्ट कर दूँ उन मन्त्रों के द्वारा --किन्तु  फिर मन में यह बात आयी उतनी देर में आगे बढ़ने के उपाय सोचना चाहिए --अतः समय तो बराबर लगता है --हानि या लाभ पहुंचाने में तो --वैर भाव ख़त्म करके लाभ की ओर क्यों न बढ़ें | ॐ |  आत्मकथा 


----ॐ श्रीगुरु चरण कमलेभ्यो नमः 

भवदीय -श्री कन्हैयालाल झा शास्त्री { खगोलशास्त्री }

पता किशनपुरी धर्मशाला देहली गेट मेरठ 

गुरुवार, 11 दिसंबर 2025

आत्मकथा की अन्तिम बातों को पढ़ें -भाग -127 - ज्योतिषी झा मेरठ

आत्मकथा के पाठकगण - यह आत्मकथा भले ही हमने लिखने का प्रयास किया है --कोई भी व्यक्ति इस आत्मकथा को पढ़ेगा --तो उसे ऐसा प्रतीत होगा -यह कथा मेरी लिखी गयी है | यह सच है -हर व्यक्ति सुख दुःखों से गुजरता है | हर व्यक्ति की बढियाँ जिन्हें की तमन्ना होती है --पर भाग्य के आगे वह लाचार होता है या सही मार्गदर्शन नहीं मिलने के कारण  योग्य होने के बाद भी दुःखों को झेलता है | मैं अपने पिता से बहुत स्नेह करता हूँ --पर आपस में हमारा संवाद कभी नहीं हुआ --मुझे यह नहीं अनुभव हुआ पिता क्या चाहते हैं --पिता को यह कभी भरोसा नहीं हुआ हम उनके लिए ही सबकुछ कर रहे हैं | -जब हम सुखद जीवन जी रहे थे - तो हमें लगा -सबकुछ है फिर भी पिता से नफरत क्यों हैं --हमारे मार्गदर्शन देने वाले नहीं थे --तो हमने जीवनी लिखने का प्रयास किया --उसमें यह ढूंढ रहा था  कमी कहाँ रह गयी -33 भाग लिखने के बाद पिता दिवंगत हो गए | उसके बाद मेरी सरस्वती चली गयी -न तो उसके बाद गाना गाया ,न ही उमंग रही ,न ही जीने की तमन्ना --यह बात -2018 की है | आज -11 /12 /2025 है --तबसे आज तक मैं मन से स्वस्थ नहीं हुआ | खाना ,पीना ,पहनना ,जीना सबकुछ हो रहा है --पर यह मेरा शरीर ,मेरा मन अशांत है -- यह बात न तो मेरी पतनी को पत्ता है न ही परिजनों को न ही बच्चों को | सबको लगता है --देखने में ठीक - ठाक है ,खाता -पीता है --हँसता -बोलता है --फिर यह बीमार कैसे हो सकता है | ---अस्तु ----जीवन में हमने यह अनुभव किया है --सुख -दुःखों  का सामना वही व्यक्ति कर सकता है --जिसे विरासत में मार्गदर्शन मिला हो | मुझे यह कष्ट नहीं है कि मुझे दुःख बहुत मिले ,--मुझे यह दुःख है --जो बातें शास्त्र -पुराणों में कही गयीं हैं -अगर एक शास्त्री नहीं माने तो कौन मानेगा | दूसरी बात अगर शास्त्रों के पथ पर चले तो जीवन जीना दुर्लभ है --ऐसी स्थिति में सिर्फ मार्गदर्शन ही काम आ सकता है | आज जो ज्ञान मिला वो पिता का योगदान के कारण किन्तु -पिता अनपढ़ थे -तो उनकी नजर में छलिया था ,तेज था | दोस्तों --1996 में घड़ी सीखने की नौकरी की सफलता नहीं मिली | 1997  में नौकरी की स्प्रिंग में टेम्पर चढाने की सफलता नहीं मिली --जबकि पढ़ा -लिखा शास्त्री थे | कोई नौकरी नहीं मिली या हम उस योग्य नहीं थे या भाग्य ही अच्छा नहीं था --ज्योतिष के सभी ग्रन्थ जिह्वा पर थे -पर ज्योतिषी नहीं थे ,वेद के बहुत अध्याय जिह्वा पर थे -फिर भी बेरोजगार थे ,संगीत के दसों ठाठ जिह्वा पर थे फिर भी बेरोजगार थे | सात भाषा की जानकरी थी फिर भी बेरोजगार थे | --बात -1990 की है --रेडियो स्टेशन दिल्ली चला गया --उन्हौनें --इतना लताड़ा की पढ़ने मुम्बई चला गया -1991 में | 1994 में पिता के कारण मुम्बई की शिक्षा छोड़कर घर आ गए --घरवाली का मंगलसूत्र बेचकर पिता का कर्ज चुकाया --फिर भी पिता का नहीं हो सका | 2000 से 2009 तक संगीत की उत्तम शिक्षा ली फिर भी अधूरे रहे | 2010 से नेट की दुनिया में आया --आज -11 /12 /2025 है --आजतक सिर्फ मेहनत की है | सभी ज्ञान जो मुझमें था लिखा ब्लॉगपोस्ट पर -पर कुछ नहीं मिला |  जीवन भर कुछ न कुछ करता रहा पर आजतक किसी लाइक नहीं हुआ | मैं व्यक्तिगत किसी को शत्रु मानता  ही नहीं हूँ --फिर भी सबका शत्रु हूँ | --वसुधैव कुटुम्बकम --मानता हूँ फिर भी अपने आपको अकेला पाता हूँ | क्यों ----क्योंकि भले ही हमने बहुत मेहनत की ,भले ही बहुत पढ़ाई की --यह मैं ही तो सोचता हूँ --इस मैं को सिर्फ मार्गदर्शन दाता ही ठीक कर सकते थे --जो नहीं मिले | अगर व्यक्ति -पतनी की ,भाई की ,मित्र की ,माता पिता की ,गुरुजनों की या संत --महात्माओं की शरण में रहेगा तो --उसका अहंकार समाप्त होगा अन्यथा --मेरी तरह जियेगा | उम्मीद करता हूँ --मेरी आत्मकथा से सभी पाठक यह बात सीखेंगें | अब केवल एक भाग और लिखने के बाद आत्मकथा पूर्ण हो जाएगी --ॐ | -भवदीय निवेदक खगोलशास्त्री झा मेरठ -ज्योतिष की समस्त  जानकारी के लिए इस लिंक पर पधारें ---https://khagolshastri.blogspot.com/




मंगलवार, 2 दिसंबर 2025

मेरी कुण्डली का बारहवां घर आत्मकथा पढ़ें -भाग -126 - ज्योतिषी झा मेरठ

हमारे प्रिय पाठकगण --किसी भी कुण्डली के बारहवें  घर से -व्यक्ति का सत्संग और  धन खर्च करने के तरीके पर बिचार किया जाता है |  मेरी कुण्डली सिंह लग्न की है -लग्न में सूर्यदेव और मंगल + केतु उपस्थित हैं --ये  हमारे स्वभाव और प्रभाव को बहुत ही सशक्त बनाये हैं ---किसी भी व्यक्ति का स्वभाव तभी मजबूत हो सकता है --जब वह स्वस्थ और धनवान हो --अतः मेरी कुण्डली का दूसरा घर भी बहुत मजबूत है --बुध +शुक्र के साथ | जब व्यक्ति का स्वभाव + प्रभाव और स्वास्थ के साथ धन हो तो शान से व्यक्ति जीता है --अतः बारहवें घर का स्वामी चन्द्रमा उच्च का कर्मक्षेत्र में बिराजमान है --अतः --मेरा सत्संग  और खर्च करने के तरीके निराले रहे हैं | उत्तम भोजन ,उत्तम वस्त्र ,उत्तम रहन -सहन ,उत्तम सत्संग के साथ जीवन शैली उत्तम दर्जे की रही है |  मेरी किताब हों ,वस्त्र हों ,निवास हो या सत्संग धवल सदा रहते हैं | इसलिए हमारी किसी से बनती नहीं है | --जब व्यक्ति के प्रथम  ,द्वितीय और द्वादश ये घर उत्तम हों --तो अहंकारी होना स्वभावतः सत्य है --इसलिए कभी दोस्ती किसी से ज्यादा चलती नहीं है --सदा अकेले जीने का स्वभाव रहा है  | -एक बात ध्यान दें -धन हो और सही खर्च करें  यह हो ही नहीं सकता है | स्वभाव का मजबूत हो प्रभावशाली हो तो -ऐसा व्यक्ति दबकर नहीं रहता | खर्च सात्विक हो विवेक से हो --तो सत्संग अल्प  होगा --अतः ऐसे व्यक्ति का जीना दुर्लभ हो जाता है --इसलिए हमारा प्रभाव क्षेत्र और सगे -सम्बन्धियों से कभी बनी नहीं | --यह बात सौ प्रतिशत सही है | -----अस्तु --- दोस्तों हमने किताबों को पढ़ने के बाद और अपने अनुभव करने के बाद यह अनुभव किया है -केवल सही मार्गदर्शन किसी भी व्यक्ति को नहीं मिलने के कारण --वो अधूरा रहता है |  अपनी जगह किताब भी सही है --तो अपनी जगह अनुभव भी सही होता है --केवल तालमेल बिठाने के लिए अगर व्यक्ति को शास्त्रों का ज्ञान भी हो जाय और उत्तम मार्गदर्शन दाता का सान्निध्य मिल जाय --तो वो व्यक्ति बड़ा भाग्यशाली होता है | मेरे जीवन में ज्ञान तो खूब मिला पर --गुरु भी बहुत ही उत्तम थे किन्तु --हमारे माता पिता और समाज अनपढ़ था --इसके बाद ज्ञान के लिए तो बिहार से होते हुए ,यू पी से होते हुए मुम्बई तक पहुंचे --केवल ज्ञान अर्जित करते रहे --पर सही गुरु का सान्निध्य -बिहार में -16 वर्ष में छूट गया | अतः मेरा जीवन अधूरा रहा --ज्ञान से पूर्ण होने के बाद भी विवेक रूपी वरदहस्त  गुरु का नहीं रहा | --हम अपने पाठकगण से एक ही अनुरोध करना चाहते हैं --भले ही ज्ञान बहुत हो जाय किन्तु  मार्गदर्शन में रहेंगें तो --विवेक बना रहेगा अन्यथा --सबकुछ होगा  मेरी तरह पर अपने आपको एकदिन अकेला पायेंगें |  मुझे जीवन में सबकुछ मिला जो चाहा हमने --वस्त्र हों ,भवन हों , उत्तम रहन -सहन हों ,ज्ञान हों --पर विवेक हीन रहा --माता पिता के साथ -साथ परिजनों को शास्त्रों से जीतना चाहा --जो कुछ देर के लिए तो ठीक था पर दीर्घकाल इसका प्रभाव नहीं रहा | भारतीय समाज --किताबों पर शास्त्रों पर आधारित तो है --पर जीवन शैली  इसके विपरीत  है | सभी माता पिता अपने बच्चों को बड़ा तो बनाना चाहते हैं --पर खुद बड़ा नहीं बनना चाहते हैं --इसलिए --पिता का पुत्र से मेल -किताबों  का नहीं आत्मा  का होता है ,समाज का समाज से मेल किताबों  से नहीं भावना से होता है | इस कारण से समाज में दो तरह के जीवन होते हैं --एक शिक्षा का और दूसरा व्यवहार का --हर व्यक्ति को जबतक दोनों ज्ञान नहीं होंगें --पग -पग पर युद्ध होता रहता है --मैं बड़ा तो मैं बड़ा ----जब हम -55 साल के हो गए --तो हमें लगता है -वास्तव में मुझसे ज्ञानी सभी हैं --सबसे छोटा मैं ही इस संसार में हूँ --अतः अब न तो कोई मेरा शत्रु है न मित्र --सिर्फ हम अपने कर्तव्य पथ पर चलना चाहते हैं --दूसरे को आगे बढ़ते देखना चाहते हैं | --दोस्तों ---हमने अपनी कुण्डली के सभी भावों को दर्शाया --इस संसार में सभी में कुछ न कुछ कमी होती है --उन कमियों को सिर्फ मार्गदर्शन और छोटा बनकर ही ठीक किया जा सकता है --अतः आगे मेरा यही प्रयास रहेगा | ॐ श्रीसरस्वत्यै नमः ॐ | --आगे सिर्फ आत्मकथा के 5 भागों को लिखने के बाद समाप्त करेंगें --उन भागों में कुण्डली और कर्मकाण्ड पर विवेचन करेंगें | -भवदीय निवेदक खगोलशास्त्री झा मेरठ -ज्योतिष की समस्त  जानकारी के लिए इस लिंक पर पधारें ---https://khagolshastri.blogspot.com/



शुक्रवार, 28 नवंबर 2025

मेरी कुण्डली का एकादश घर आत्मकथा पढ़ें -भाग -125 - ज्योतिषी झा मेरठ

मेरी आत्मकथा के पाठकगण --एग्यारहवाँ {एकादश } कुण्डली के घर से आय किस मार्ग से या किस विधि से होगी  --ज्यादातर विचार किया जाता है साथ ही धन की स्थिति दूसरे घर से देखि जाती है | --मेरी कुण्डली में वैसे ये दोनों घर उत्तम है शास्त्रों के अनुसार --किन्तु आज के युग में शास्त्र नहीं काम करते हैं --इसलिए चाहे धर्म पर चलें या अधर्म पर दुःखी सबको होना होता है | ----अस्तु --मैं सिंह लग्न का हूँ साथ ही लग्न में सूर्यदेव हैं मंगल और केतु के साथ | कर्मक्षेत्र  और प्रभाव क्षेत्र का स्वामी शुक्र बुध के साथ दूसरे घर में है | दूसरे घर का और आय क्षेत्र का स्वामी उच्च का दूसरे घर में ही है | कर्मक्षेत्र में उच्च का चन्द्रमा है | दो दो त्रिकोणेश लग्न में उत्तम स्थिति में विराजमान है | तमाम ग्रहों के प्रभाव से मेरा जीवन राजा की तरह रहेगा --यह बात जब हम केवल 8 वर्ष के थे तो पिताजी को एक ज्योतिषी गुरु ने कही थी --एक दिन यह बालक राजा की तरह जियेगा | --उस समय मंगल की महादशा चल रही थी --जिसकी वजह से अनायास मेरे बालों में आग लग जाया करती थी --इस बात हेतु मेरे पिताजी ज्योतिषी जी के पास गए थे --संयोग से उस समय हमारे परिवार में राजयोग चल रहा था | जब हम 10 वर्ष के हुए --तो अंग्रेजी की शिक्षा से संस्कृत की शिक्षा में आ गए --अपने मत से -पहला पलायन पातेपुर --जिला वैशाली {बिहार } हुआ | इसी बीच -दीदी की शादी हुई --उस शादी में न तो हम सम्मिलित हुए न ही खबर मिली | --जब हम 12 वर्ष के हुए राहु की दशा शुरू हुई तो --यह शिक्षा छूट गयी और हम गांव आ गए तो पता चला -जमीन बेचकर दीदी की शादी हुई | इसके तत्काल ही --चोर दीदी का घर का सारा सामान ले गए | पिताजी की दुकान बिक गयी | जमीन नदी में समा गयी -पक्की तीन बीघा थी | घर गिर गया | हम महादरिद्र हो गए | अंत में अनुज भी सर्पदंश से मर गया --यह स्थिति बहुत ही भयानक थी -- किन्तु हमारी शिक्षा चलती रही अपने बल पर | कुछ -कुछ यज्ञों से धन मैं कमाता था मां को देता था ---यह स्थिति जब हम 28 वर्ष के हुए तबतक रही | इसी बीच बिहार से मेरठ और मेरठ से मुम्बई हमारी शिक्षा चलती रही --दो बिटियां थी ,घर का वजन मेरे पर था ,पढ़ाई भी थी --अंत में हार मान ली --पढ़ना नहीं है --नौकरी नहीं मिली ---दर -दर की ठोकरे खाते रहे --एक दिन निराश होकर शिव की शरण में रोने लगा ---मानों शिव ने स्वयं अपने दोनों हाथों से उठाया | फिर राजयोग शुरू हुआ --मकान मिला ,वाहन मिला ,भूखंड मिला ,दोनों बेटियों की शीदी उत्तम हुई ,बालक की शिक्षा भी उत्तम हुई | इसके अलावा मेरी शिक्षा फिर से शुरू हुई जो आजतक चल रही है | वैसे नियमित आय का साधन कुछ नहीं है --फिर भी हम राजा हुए --यह मुझे भाग्य से मिला | हमने किसी को ठगा नहीं है ,हमने किसी को बरगलाया नहीं है हमने कभी याचना इंसानों से नहीं की है --स्वाभिमान से जीने का सदा प्रयास किया है --जो शिव की शरण में रहता है --उसे वो स्वयं उसकी देखभाल करते हैं | मुझे कईबार --आश्चर्य होता है --मैं चल कैसे रहा हूँ ,मैं जी कैसे रहा हूँ --फिर अहसास होता है --तू नहीं चलता है --तुझे कोई और चलाता है | तू नहीं कमाता है --तुझे भोले नाथ कमाकर देते हैं --अतः हम सदा शिव की शरण में रहते हैं --उन्हीं से याचना करता हूँ --वही हमारी सुनते हैं | --दोस्तों अपने जीवन में हमने सबसे ज्यादा पढ़ाई पर ध्यान दिया है -- मेरे पास सरस्वती और लक्ष्मी दोनों --बराबर मात्रा में हैं ---धन केवल जीने के लिए कमाया है --पढ़ाई केवल उत्तम समाज की रचना के लिए की है --पर लोग मुझे केवल धन से जानते हैं --इस बात का मुझे बहुत दुःख होता है | --अंत में यह कहना है -कुण्डली सच बोलती है | ---अगले भाग में मेरी कुण्डली का बारहवां 



घर पर चर्चा करेंगें ---भवदीय निवेदक खगोलशास्त्री झा मेरठ -ज्योतिष की समस्त  जानकारी के लिए इस लिंक पर पधारें ---https://khagolshastri.blogspot.com/

बुधवार, 19 नवंबर 2025

मेरी कुण्डली का दशवां घर आत्मकथा पढ़ें -भाग -124 - ज्योतिषी झा मेरठ

जन्मकुण्डली का दशवां घर व्यक्ति के कर्मक्षेत्र और पिता दोनों पर प्रकाश डालता है | --मेरी कुण्डली का दशवां घर उत्तम है | इस घर की राशि वृष है -इसका स्वामी शुक्र -बुध के साथ दूसरे घर में  विराजमान है --वैसे शुक्र नीच का है किन्तु बुध उच्च का अतः --शुक्र का नीच होना बुध की वजह से समाप्त हो गया | दशवें घर में चन्द्रमा उच्च का है | मेरी कुण्डली में लग्नेश ,त्रिकोणेश के साथ केंद्र में अकेला चद्र उच्च का होकर मुझे बहुत ही मजबूत बनाया है | धनेश बुध +शुक्र की युति ने मेरे जीवन में चार चाँद लगा दिए | जब जन्म हुआ तो राजयोग चन्द्रमा की दशा में हुआ --किन्तु इसकी अवधि के ढाई वर्ष थी अतः कम समय का राजयोग रहा | इसके बाद मंगल की अवधि भी कम रही - जब हम 10 वर्ष के हुए तो राहु की दशा शुरू हुई जो 28 वर्ष के जब हम हुए तब तक रही | यह राहु की दशा -सभी उत्तम ग्रहों पर भारी रही --शिक्षा ,दीक्षा ,नौकरी ,विवाह ,संतान ,सभी क्षेत्रों में मुझे बहुत संघर्ष रहा | केवल एक चीज बढ़िया रही -शिक्षा चलती रही --विवाह और पुत्री होने के बाद भी बहुत उत्तम शिक्षा मिली | इस शिक्षा का लाभ कभी नहीं मिला | इस शिक्षा की वजह से आज मैं सशक्त तो हूँ  किन्तु कर्मक्षेत्र आज भी प्रभु के सहारे है | अपने जीवन में शिक्षा हो या जरुरत की चीजें --खुद अर्जित की किसी ने सहता नहीं की | एक दौर ऐसा आया -शिक्षा का विरोधी पिता माता के साथ  पतनी भी बन गयी | किन्तु जब हम -28 वर्ष के हुए --साथ ही फिर से उत्तम दशा शुरू हुई तो --शिक्षा भी चलने लगी और कर्मक्षेत्र भी मजबूत हो गया | अपने जीवन में जब यह अनुभव हुआ ईस्वर ही सबकुछ हैं -उनकी शरण में रहो तो प्रभु ने मुझे दोनों हाथों से उठाया | हमें जो शिक्षा मिली उससे कभी धन ज्यादा नहीं मिला | मुझे शिक्षा में जितनी मेहनत करनी पड़ी उतना कमाने में श्रम नहीं करना पड़ा | मुझे  ज्योतिष विद्या या संगीत से या पढ़ाई से कोई धन नहीं मिला | मुझे अपने जीवन में ज्यादातर समय निरर्थक लगा | मुझे धन पुरस्कार स्वरुप मिला साथ ही यह व्यवस्था स्वयं भोले नाथ ने की | मेरा  गुजारा कैसे चलता है --आज तक पता नहीं चला | जब भी धन की जरुरत होती है --भोले नाथ से कहा वो  जरुरत से ज्यादा दे दिया करते हैं | मुझे कईबार यह अनुभव हुआ मैं कुछ नहीं कर सकता हूँ --अपने आपको शिव को समर्पित कर दिया --उन्हौनें जरुरत से ज्यादा दे दिए | मेरे पास सरस्वती ज्यादा है --किन्तु लोग मुझे धन से ज्यादा जानते हैं | माता -पिता ,परिजन सभी धन से मुझे जानते हैं | जो मेरे यजमान बनते हैं या होते हैं --उन्हौनें  हमारी सरस्वती को नहीं परख पाए --बल्कि धन से मुझे तौला है ---इस बात का मुझे बहु कष्ट होता है | मैं अपने समस्त परिजनों से दिल से प्रेम करता हूँ --किन्तु --प्रत्यक्ष नफ़रत का स्वरूर रखता हूँ --अतः व्यक्तिगत मैं किसी को शत्रु नहीं समझता --पर सभी को लगता है मैं अहंकारी हूँ  | अंत में अपने कर्मक्षेत्र के बारे में इतना कह सकता हूँ ---अनायास विशेष धन प्राप्ति का राजयोग है --सो कोई न कोई धन रूपी  पुरस्कार देता रहता है --जिसे हम खुद नहीं जानते होते हैं | अपने पिता से मैं बहुत प्रेम करता हूँ --ईस्वर और उनमें  मुझे कोई अन्तर नहीं दिखा है --पर यह प्रत्यक्ष देखने पर नहीं लगता --क्योंकि दोनों में कभी बनी नहीं | कर्मक्षेत्र में मेरी सोच है --जब गारंटी ज्योतिष या कर्मकाण्ड का यजमान महत्व देते हैं तो फिर --मुद्रा को सबसे ऊपर कर दो --इससे यह फायदा होगा --शांति से भजन करोगे अन्यथा निरंतर लोग परेशान करेंगें | ---अगले भाग में मेरी कुण्डली का   एकादश घर पर चर्चा करेंगें ---भवदीय निवेदक खगोलशास्त्री झा मेरठ -ज्योतिष की समस्त  जानकारी के लिए इस लिंक पर पधारें -- - https://khagolshastri.blogspot.com/



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सोमवार, 6 अक्टूबर 2025

मेरी कुण्डली का नवां घर आत्मकथा पढ़ें -भाग -123 - ज्योतिषी झा मेरठ




हमारे ज्योतिष एवं कर्मकाण्ड क्वे नियमित पाठकगण --जीवन भर लोगों की कुण्डलियों का आकलन करते रहे पर अपनी  जन्मकुण्डली को देखने का गुरु का आदेश नहीं था -अतः जीवन भर कर्मकाण्ड के पथ पर मेरा जीवन चलता रहा | जब अपनी आत्मकथा में अपनी कमियों को ढूंढ रहा था --तो अनुभव हुआ -जैसे दीपक के नीचे अँधेरा होता है --वैसा ही मेरा जीवन रहा --अगर मुझे यह अनुभव होता कि हमारी कुण्डली क्या कहती है और मुझे क्या करना चाहिए साथ ही परिस्थिति होती और सही मार्गदर्शन दाता होते तो शायद  मेरा भी जीवन कुछ और होता | भारत भूमि पर एक कहावत है जस देवता तस गरगरी --अर्थात -- ज्यादातर लोग केवल जन्मपत्री में यकीं तो करते हैं -पर निदान शून्य होता है --इसका प्रभाव जीवन भर भ्रान्ति में जन्मपत्री लेकर भटकते रहते हैं --थोर -बहुत जो भरोसा होता है वह भी समाप्त हो जाता है | अंत में हर व्यक्ति को ज्योतिष और ज्योतिषी पर विस्वास खत्म हो जाता है | जबकि --मुझे अनुभव हुआ है --सही मार्गदर्शन सही संस्कारों के बाद ही संभव है | आज हर व्यक्ति गरीबी रेखा से आगे है --पर संस्कार के मामले में सबसे गरीब होता जा रहा है --जब संस्कार नहीं तो ज्योतिष का लाभ वैदिक की जगह -तंत्र मन्त्र से लेना चाहते हैं --जिसका परिणाम तनिक देर के लिए लाभ दे सकता है दीर्घकाल नहीं --हो सके तो संस्कारों को अमल करें -अपने बच्चों में डालें | ---अस्तु ---कुण्डली का नवां घर --भाग्य कहलाता है | मेरा भाग्य बहुत ही अच्छा रहा भौतिक जीवन के लिए --किन्तु मेरी आत्मा कभी खुश नहीं रही --क्यों ? --एक शास्त्री ब्राहण के लिए कुछ नियम होते हैं --जिनका हमें पालन करना चाहिए -आज के समय जब केवल धन से व्यक्ति का आकलन होता है --उसमें तो मैं राजा हो गया | धन कहीं से कैसे भी आये अगर यह जीवन है तो हमारे परिजन खुश हो सकते हैं --पर मेरी आत्मा कभी खुश नहीं हुई | धन कमाना था ,गरीबी से उठना था --मेरी कुण्डली के नवम भाव में शनि नीच का विराजमान है साथ ही गुरु की पूर्ण दृस्टि पड़ रही है और नवम घर का स्वामी मंगल मित्र सूर्य की राशि में लगन में है --लगन में सूर्य और मंगल की युति है --हमने धन की चाहत में इस योग को जानने के लिए -बहुत ग्रंथों को पढ़ा, यह योग का ज्ञान मुझे केवल 13 वर्ष में श्रीमाली जी की राशिफल किताब से अनुभव हो चूका था --जब मेरी कुण्डली में दरिद्र योग चल रहा था --कईबार मुझे ग्रंथों पर भरोसा नहीं रहा --क्योंकि कुण्डली का लाभ धन का मुझे जब हम -30 वर्ष के हुए तब अनायास मिला | तबतक ज्योतिष से यकीन हट चूका था -हम अपने आपको निःसहाय मानने लगे थे | मेरा विवाह -1990 में हुआ किन्तु --अनायास --1999 में पतनी मेरे पास मेरठ आयी --तब अनायास मेरा भाग्योदय हुआ | पहले सदा हम यह सोचते थे यह उचित नहीं है -तर्क और कुतर्क के घेरे में सदा रहते थे -किन्तु पतनी आने के बाद यह सोच हट गयी --केवल धन चाहिए -- क्योकि भाग्य में नीच का शनि है --तो नीच व्यक्ति से ही लाभ मिलेगा | जो धार्मिक थे जिनके लिए जीवन भर चाकरी की उन्होनें कुछ नहीं दिया --जो नीच प्रवृत्ति के थे --उन्होनें कार्य होते ही मुठी भर -भर के दिए | --आज लोग मुझे ज्ञान से नहीं धन से जानते हैं --इस बात से मैं बहुत दुःखी रहता हूँ | जबकि जीवन भर ज्ञान के लिए ही कोशिश की है --आज भी सदा प्रयास रखता हूँ --ज्ञान की खोज करें --जिसका लाभ कभी नहीं मिला | धन अनायास और थोड़े से प्रयास में बहुत मिला है --जिसका स्वभाव से मेरे लिए महत्व नहीं होता है | --हम सदा चाहते हैं --पढ़ें ,पढ़ाएं ,दान लें दान दें ,यज्ञ करें और कराएं ---पर इन नियमों पर सभी नहीं उतरते हैं इसका मुझे बहुत ही मलाल रहता है | --अगले भाग में मेरी कुण्डली का दशवां घर पर चर्चा करेंगें ---भवदीय निवेदक खगोलशास्त्री झा मेरठ -ज्योतिष की समस्त  जानकारी के लिए इस लिंक पर पधारें khagolshastri.blogspot.com  


देश -विदेश की भविष्यवाणी -पढ़ें -08/10 /25 से 21 /10 /25 तक -ज्योतिषी झा मेरठ




 ॐ श्रीसंवत -2082 -शाके -1947  कार्तिक कृष्णपक्ष --तदनुसार दिनांक -08/10 /2025 से 21 /10 /2025 तक देश -विदेश  भविष्यवाणी की बात करें --एक प्रमाण देखें ---यत्र मासे महिसुनौर जायन्ते पंच वासराः ,रक्तेन पूरिता पृथ्वी छत्र भंगस्ततदा  भवेत , बुधस्य पंच वाराः स्यु यत्र मासे निरन्तरम ,प्रजाश्च सुख संपन्ना सुभिक्षं च प्रजायते ,---प्रस्तुत श्लोकों का भाव है --इस मास संसार में सुख -दुःख समान देखने को मिलेगें | विश्व समुदाय अमेरिकादि देशों में तनाव बढ़ेगा ,तो कहीं शान्ति की परिचर्चा होगी | संसार की व्यवस्था को सुचारु रूप से नये नियम बनाये जा सकते हैं | एक और प्रमाण देखें ---कन्या राशि गते शुकरौ सर्वसस्य विनस्यति ,तत्र धान्य महर्घाणी शालीश्चैव  विशेषतः ----अर्थात खाद्य पदार्थों में तेजी का चक्र चलेगा | इस मशीनरी ,कलपुर्जे ,वाहन ,सभी धातु ,मेवा ,मिष्ठान्न ,नाना प्रकार के फल ,चीनी ,चावल ,अचार -मुरब्बा विशेष तेज हो सकते हैं | इस महीने तिथि घटा -बढ़ी का प्रभाव यह होगा --चालू मार्किट का रुख नरम रहेगा | कर्क उच्च में गुरु का फल भी ऐसा ही घटित होता है | ----आकाश लक्षण की बात करें तो --ग्रह योगायोग से यत्र -तत्र वर्षा का योग है | पर्वतीय संभागों में कहीं अधिक वर्षा होगी | बांध विखंडन जल प्रलय का कारण बन सकता है | ---दिवाली का प्रभाव --मंगलवारी पड़े दिवारी  हंसे किसान रोवे व्यापारी ----दीपावली मंगलवारी चित्रा नक्षत्र का योग फसलों की आवक को बढ़ायेगा | कृषकों को लाभ मिलेगा ,व्यापार अनिश्चित चलेगा ,घाटा बढ़ सकता है | लेन -देन  सोच समझकर करें | -------भवदीय निवेदक खगोलशास्त्री झा मेरठ -ज्योतिष की समस्त  जानकारी के लिए इस लिंक पर पधारें khagolshastri.blogspot.com  


गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025

मेरी कुण्डली का आठवां घर आत्मकथा पढ़ें -भाग -122 - ज्योतिषी झा मेरठ




 दोस्तों - कुण्डली एक दर्पण है -जिसमें  अध्ययन हो ,गुरुकृपा हो एवं जीवन का लक्ष्य तप पर आधारित हो साथ ही नजरें हों तो सबकुछ स्पष्ट दिखेगा | हर व्यक्ति की कुण्डली का आठवां घर वैसा ही महत्व रखता है -जैसा किसी भवन की नींव जितनी मजबूत होगी उसकी छत उसी के अनुसार टिकी रहती है | ---अस्तु --मेरी कुण्डली का पहला घर बहुत ही मजबूत है -तो आठवां घर भी बहुत ही मजबूत है | ईस्वर ने जीवन में दुःख अनन्त लिखे तो सुख भी अनन्त लिखे | जीवन में कईबार मरना चाहा पर मरे नहीं | एकबार उम्र थी -12 वर्ष अपने गांव से 15 किलोमीटर दूर पिता के साथ रहते थे --एकबार डांट दिये पिताने --फिर क्या था -बहुत तेज पैदल -पैदल भागा -रस्ते में सर्प से लिपटे पर भागते रहे -शाम -6 बजे चलना शुरू किये --अँधेरा मार्ग  था पर पक्की सड़क थी | कब क्या हुआ पता नहीं रात्रि -8 बजे घर पहुंचा --माँ ने गरम पानी से दोनों टांगों को धोया --हम सही सलामत रहे |  एकबार  उम्र थी 14 वर्ष -सरकार ने आश्रम में गाय चराने नहीं गया बारिस हो रही थी --कारण था --मेरे पैरों में चप्पल नहीं होने के कारण तलवों में गड्डे  हो गए थे --जिसका असह्य दर्द हो रहा था --न ओषधि न दुआ --दर्द से कराह रहा था --ऐसी स्थिति में सरकार ने रस्सी से मारा गरीबी चरम सीमा पर थी --सोचा  कहाँ जाऊ --न तातो न माता --तो मृत्यु नजर आयी -बिजली के तारों को छूकर मरना चाहा पर --बिजली ने झटका देकर छोड़ दिया --यहाँ भी मृत्यु नहीं आयी | एकबार उम्र -15 वर्ष  अनायास प्रेम पत्र लिखा -वह पत्र वापस विद्यालय आया -गुरूजी ने एक थापर जर दिया --मेरा ललाट अलवारी से टकराया --खून की धारा बहने लगी --मारने वालो  को यह स्थिति देखि नहीं गयी --बोले भाग जा --हमने कहा मुझे जीना नहीं है  यहीं मरना चाहता हूँ --पर -क्या विद्यालय ,क्या परिजन ,क्या गुरुजन और छात्र सभी जगह परिहास होने लगा --जीवन मृत्यु से ही बदतर हुआ पर फिर भी निर्लज की तरह जीता रहा | --उम्र 18 वर्ष --मेरा अनुज अनायास सर्पदंश से मर गया --इसके बाद मानों मैं अजर अमर हो गया --पथ्थर की तरह | -जीवन में सिर्फ यह शरीर साथ दे रहा था --जबकि इस शरीर को कभी दूध ,दही या पौष्टिक आहार नहीं मिला | इसके बाद -चाहे माता पिता हों ,परिजन हों  या सगे -सम्बन्धी हों या रोजगार --सबने मृत्यु के द्वार तक पहुंचाए पर फिर भी मरे नहीं | -- इसके बाद -उम्र -30 हुई राजयोग आया --पतनी के सहारे चलना सीखा -धन मिला ,भवन मिले ,बच्चे मिले ,वाहन मिले सभी सुख मिले --किन्तु --कईबार  ऐसा लगा --चूड़ियां  पतनी की जगह खुद पहन लूँ --क्योंकि पतनी के साथ चलने पर सबकुछ तो था --पर स्वाभिमान बिक गया --यह स्वाभिमान एक पुरुष का ऐसा जहर होता है --जो नित्य मृत्यु के द्वार तक ले जाता है फिर वहीँ लाकर खड़ा कर देता है |  कहने का अभिप्राय है --मेरी कुण्डली में दीर्घायु योग था लग्नेश और सप्तमेश की वजह से इसलिए जीते रहे | इस घर का स्वामी तृतीय भाव में विराजमान है --अतः स्वाभिमान को चोट पहुंचना निरंतर लिखा हुआ है --सो यह चोट आज जब हम 55 वर्ष के हो गए  तो निरंतर चोट स स्वाभिमान की लगती रहती है --यह घूंट निरंतर पीता रहता हूँ --मरना भी चाहता हूँ पर यह अभी तक संभव नहीं हुआ है | ----अगले भाग में -नवां 


घर की चर्चा करेंगें | ---भवदीय निवेदक खगोलशास्त्री झा मेरठ -ज्योतिष की समस्त  जानकारी के लिए इस लिंक पर पधारें khagolshastri.blogspot.com  

सोमवार, 22 सितंबर 2025

देश -विदेश की भविष्यवाणी -पढ़ें -22 /09 /25 से 07 /10 /25 तक -ज्योतिषी झा मेरठ




 ॐ श्रीसंवत -2082 --शाके -1947 आश्विन शुक्लपक्ष -तदनुसार दिनांक -22 /09 /2025 से 07 /10 / 2025 तक देश -विदेश भविष्यवाणी की बात करें --नवरात्र की शुरुआत सोमवार से उत्तम है | माता  हाथी पर सवार होकर पधारी हैं -अतः खेती में उत्पादन उत्तम होगा | गुड़ ,शक्कर ,हरी सब्जी ,रुई ,कपास ,अरहर ,मूंग ,मसूर ,आलू ,गाजर ,टमाटर ,अनाज की खेती पर्याप्त होगी | सरकार कृषकों को म प्रमुखता देगी | ---एक प्रमाण देखें ---सोमस्य पंचवाराः स्युः यत्र मासे भवन्ति हि ,धन धान्य समृद्धिः स्यात सुखं भवति सर्वदा ---भावार्थ --देश -देशान्तरों में विकास को बल मिलेगा | उत्पादन की अच्छी उम्मीद खुशहाली का कारण बनेगी | ----तेजी मन्दी की बात करें तो --बाजार का रुख नरम रहेगा | तृतीया तिथि की वृद्धि होने से चालू भावों में गिरावट होगी | --विशेष --कहीं वर्चस्व की लड़ाई आर -पार लड़ी जायेगी | आकाश लक्षण की बात करें तो ---पक्षांतर्गत घामाछायी सी चलेगी | वायुवेग के साथ यत्र -तत्र बूंदा -बांदी हो सकती है | विजयदशमी एवं शरदपूर्णिमा में मौसम खराब हो सकता है | पक्ष में हल्की ठंढ पड़ने लगेगी | --29 में अगस्त तारा उदय होगा | ---------भवदीय निवेदक खगोलशास्त्री झा मेरठ -ज्योतिष की समस्त  जानकारी के लिए इस लिंक पर पधारें khagolshastri.blogspot.com  



मंगलवार, 16 सितंबर 2025

मेरी कुण्डली का सातवां घर आत्मकथा पढ़ें -भाग -121 - ज्योतिषी झा मेरठ




ॐ --आत्मकथा के पाठकगण --प्रत्येक व्यक्ति का यह सातवां घर बहुत ही मार्मिक एवं गुप्त होता है | मेरी कुण्डली की नींव लग्न प्रथम घर बहुत ही सशक्त है --तो उसकी छत भी ईस्वर ने बहुत ही बजबूत बनायीं है | मेरे जीवन में मैं जितना सशक्त ,मजबूत एक धर्म पथ पर आरूढ़ रहा तो उसमें सप्तम घर सुख की लालसा है बहुत ही योगदान रहा है | वैसे -मैं मंगली हूँ -इसका अर्थ है --या तो कई विवाह के योग हैं या खण्डित कई विवाह के योग बनेंगें | यह बात सौप्रतिशत सत्य हमने आभास किया है | यधपि बहुत सी बातों को कहने का साहस हर व्यक्ति नहीं कर सकता है --पर मुझे कहने में तनिक भी संकोच नहीं हो रहा है --क्योंकि जब दूसरे की बुराई मैंने की है --तो हम अपने चरित्र को दिखाना भी आत्मकथा का धर्म है | ---अस्तु ---मेरी कुण्डली में मंगली दोष तो है ही साथ ही सप्तम भाव का स्वामी शनि नीच का भाग्य क्षेत्र में विराजमान है | लग्नेश -सूर्य एवं मंगल एवं केतु की सप्तम भाव पर पूर्ण दृष्टि पड़ रही है | गुरु की भी पूर्ण दृष्टि पड़ रही है | खुद शनि की दृष्टि नहीं पड़ रही है | साधारणतया --इस कुण्डली को देखने पर दाम्पत्य जीवन उत्तम नहीं रहेगा --ऐसा सभी को प्रतीत होगा --बहुत दिनों तक मुझे भी ऐसा ही लगा | --अब --जब ज्योतिष का बहुत ही अनुभव देखने का हो चूका है --साथ ही अपने जीवन के उस पड़ाव पर हैं --जहाँ सीमित सुख की लालसा है --तो हमने पाया कर्मपथ उत्तम हो तो बहुत सी अनहोनी से ईस्वर रक्षा अवश्य करते हैं | उदाहरण से समझें --जब हम -14 वर्ष के हुए -तो अनायास प्रेम हुआ -जो अधूरा रहा -बदले में ऐसी चोट लगी जो अब तक गयी नहीं --उसके बाद प्रेम शब्द समाप्त हो गया --कालेज से निष्कासित हुए ,समाज  से तिरस्कृत हुए --प्रेमिका को ठीक से देखा नहीं --यह था मंगली दोष का प्रभाव और बाल्यकाल | उसके बाद --किसी भी हालत में शीघ्र विवाह करना ही लक्ष था -उसके बाद पढ़ने की तमन्ना थी --जब -19 वर्ष के हुए -अनायास तीन दिन में प्रेम विवाह किया -सबके आशीर्वाद लेकर | उसके बाद पढ़ने चला गया --मुम्बई | राहु की दशा पूर्ण यौवन में थी -जब हम -29 वर्ष के हुए --तब तक राहु की दशा रही -इसी बीच-दो कन्या ईस्वर ने दी ,शिक्षा पूर्ण नहीं हुई ,दर -दर की ठोकरे खाते रहे --पर दाम्पत्य जीवन बरकरार रहा | आगे -जब हम -30 वर्ष के हुए तबसे आजतक  -कई योग प्रेम के  बनते रहे पर -जब पतनी मजबूत हो -व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी धर्म सम्मत निभाने का प्रयास करे तो उसकी सदा ईस्वर भी सहायता करते हैं | वैसे मेरी पतनी की कुण्डली उपलब्ध नहीं है | नानी ने यह धर्मपत्नी अपने आशीर्वाद में दिया --वो परमधार्मिक थी ,माता पिता के आशीर्वाद से विवाह किया था --हमारे माता पिता भी धार्मिक थे --अतः यह धर्म भी हमें सहायता प्रदान किया | मेरी पतनी भी परमधार्मिक है --अतः एक मैं ही तो अधर्मी था --सबके धर्म के आगे मेरा अधर्म समाप्त  होता गया --और मेरा दाम्पत्य जीवन उत्तम रहा | अब अपनी कुण्डली से समझाते हैं --ऐसा कौन सा योग था --जिस पर सबकी नजर नहीं गयी ---धार्मिक विशेष ग्रहों के प्रभाव के कारण मेरा दाम्पत्य जीवन अटूट रहा --सुनें --लग्नेश सूर्य के अनुसार मंगल और केतु को चलना पड़ा --जो सप्तम दृष्टि से सुखी बनाये | शनि भले ही नीच का है --पर त्रिकोण में है --भाग्य को बढ़ाना --शनि का धर्म है --अतः दाम्पत्य जीवन ठीक रहा | गुरु भी त्रिकोण का स्वामी है --पराक्रम क्षेत्र में तो हानि हुई पर --दाम्पत्य क्षेत्र को पूर्ण सुखी बनाया | चन्द्रमा मेरा कर्मक्षेत्र में उच्च का है --अतः -धर्म सम्मत ही मन रहेगा | सबसे बड़ी बात --पतनी के भाग्य से ही भाग्यवान बने | संसार के तमाम सुख पतनी की वजह से ही प्राप्त हुए --अन्यथा मेरा जीवन नीरस होता | -चाहे ,शिक्षा हो ,संतान हों ,संपत्ति हो ,वाहन ,भवन हों ,मान -प्रतिष्ठा ,इज्जत सबकुछ अपने कर्मों से नहीं पतनी के भाग्य और कर्मों से प्राप्त हुए | ईस्वर ने हम पर बहुत कृपा करि है ---बहुत कुछ खोने के बाद भी मजबूत हैं | यह मेरी कुण्डली के सप्तम भाव का प्रभाव रहा | --अगले भाग में --आठवां घर की चर्चा करेंगें | ---भवदीय निवेदक खगोलशास्त्री झा मेरठ -ज्योतिष की समस्त  जानकारी के लिए इस लिंक पर पधारें khagolshastri.blogspot.com  


रविवार, 14 सितंबर 2025

मेरी कुण्डली का छठा घर -आत्मकथा पढ़ें -भाग -120 - ज्योतिषी झा मेरठ




ॐ --मेरी कुण्डली का छठा घर -जो रोग और शत्रुओं का है --मेरे जीवन में जन्म से लेकर आज तक कभी ऐसा नहीं रहा जब हम रोग और शत्रुओं से घिरे न रहे हों | चूंकि --इस घर का स्वामी नीच का है --इसका अर्थ है सदा रोगी रहेंगें एवं शत्रुओं से घिरे रहेंगें --किन्तु ईस्वर की विडम्बना देंखें --बचाने का मार्ग भी बड़े ही सरल बनाया है --इस छठे घर का स्वामी शनि है -जो नीच राशि भाग्य क्षेत्र और त्रिकोण में विराजमान है --किसी की भी कुण्डली हो त्रिकोण का लाभ सबको मिलता है --अतः भाग्य मेरा बहुत सबल रहा | आज जब मैं -55 वर्ष का हो चूका हूँ --तब अपनी कुण्डली का विश्लेषण कर रहा हूँ --पहले कभी अपनी कुण्डली ठीक से देखि नहीं --क्योंकि --गुरुदेव का आदेश था | अब जीवन के अन्तिम पड़ाव पर हूं --तो कोई दोष नहीं लगेगा | अस्तु ===जब बालक था तबसे सदा बीमार रहा ,तबसे ही सबके शत्रु रहा -यह कथा जीवनी में लिख चूका हूँ | कभी माँ ने बचाया तो कभी  पिता ने बचाया ,कभी दीदी ने बचाया तो कभी मामा ने बचाया --इसके बाद गुरुकुल में गुरुदेव ने बचाया --चलते -चलते कईबार घिरे -तो कोई अनायास बचाया --उसने बचाया -जिसको हम जानते तक नहीं थे | इसके बाद पतनी ने बचाया -जिस -जिस ने पीड़ित किया उससे बचने का मार्ग ईस्वर ने स्वयं बनाया --जो मैं खुद नहीं जनता था | ऐसे ही रोगों की दस्ता रही है --कोई दिन ऐसा नहीं होगा --जब हम किसी न किसी कारण से बीमार नहीं रहे होंगें ==पर तमाम रोगों पर सदा भाग्य ने विजय दिलाया | अपने जीवन में रोगों पर मेरा -50 प्रतिशत खर्च रहा है --देखने में मैं कभी किसी को बीमार नहीं दीखता पर --अंदर ही अन्दर बीमार रहा | --आज मुझे अपनी कुण्डली से यह अनुभव हो रहा है -कोई सगे -सम्बन्धी हों या रोजगार से जुड़े लोग या फिर पतनी या बच्चे हों सबसे मेरा सदा युद्ध होता रहता है -कईबार मरने का सोचा पर मरे नहीं --चलते रहे ,स्थान बदलते रहे ,मित्रों से बचते रहे ,अपनापन से दूर रहे --कईबार ऐसा लगा --अब कैसे बचेंगें --अब कैसे आगे बढ़ेंगें --पर अपने आप को फिर ईस्वर को सौंप दिए --तो वही --सभी शत्रुओं से बचाया भी आगे बढ़ाया भी --कभी रोग हो या फिर शत्रु --झुके नहीं ,थके नहीं -अपनी मस्ती में चलते रहे --यह था वास्तव में भाग्य का प्रभाव --जिसे कभी अहसास नहीं कर पाए | एक भाग्य की कथा जो कहना छठा हूँ --सुनें --मेरी चाची ने -24 मुकदमें किये मेरे पिता पर -उसमें सबको जेल जाना पड़ा -पर मुझे चाची ने कुछ नहीं कहा -यह अब समझ में आ रहा है --इतना ही नहीं -उस मुकदमें से मेरी पतनी ने सबको -माता पिता एवं अनुज के परिवार को निकाला --इसे ही भाग्य कहते हैं | -----भवदीय निवेदक खगोलशास्त्री झा मेरठ -ज्योतिष की समस्त  जानकारी के लिए इस लिंक पर पधारें khagolshastri.blogspot.com  


शुक्रवार, 12 सितंबर 2025

मेरी कुण्डली का पांचवा घर -आत्मकथा पढ़ें -भाग -119 - ज्योतिषी झा मेरठ




ॐ --हमारे पाठकगण --मेरी कुण्डली सिंह लग्न की है | पांचवा घर गुरु का है एवं गुरु- शुक्र राशि तृतीय घर -पराक्रम क्षेत्र में विराजमान हैं | इस पंचम घर पर गुरु की त्रिपाद दृस्टि पड़ रही है | पूर्ण दृस्टि किसी भी ग्रहों की नहीं पड़ रही है --इस पंचम घर पर | इसका अर्थ है --शिक्षा एवं बुद्धि का विशेष कोई लाभ नहीं मिलेगा | यह बात सौ प्रतिशत सही है | न तो मैं मान्यता प्राप्त ज्योतिषी ,वैदिक या फिर गायक कुछ भी नहीं हूँ --जबकि इन तीनों क्षेत्रों में सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया | जब ज्योतिष की डिग्री ले रहा था --तो अनुज सर्पदंश से दिवंगत हो गया --फिर भी सभी ज्योतिष के ग्रन्थ जिह्वा पर थे | वैदिक -केवल 11 वर्ष के हुए तो रुद्राष्टाध्यायी जिह्वा पर थी -किन्तु दरिद्र योग चल रहा था -न तो किसी ने मदद की न ही मार्ग मिला ,यहाँ भी -संहिता के 20 अध्याय जिह्वा पर हुए --पर यह विद्या अधूरी रही | संगीत के दसों ठाठ केवल 13 वर्ष के थे तो जिह्वा पर थे पर गुरु का विद्यालय से निष्कसन हुआ तो यह विद्या अधूरी रही --जब हम --30 वर्ष के हुए -तो पहली कमाई से हारमोनियम खरीदा और 10 वर्ष संगीत का अध्ययन किया --एक दिन पतनी ने अपमान किया --उसके बाद यह विद्या का परित्याग कर दिया | अब देखें --गुरु की त्रिपाद दृष्टि से --तीन विद्या सफलता पूर्वक  प्राप्त हुई | फिर भी अधूरे रहे | मुझे तीन संतान प्राप्त हुई -बड़ी ही ईस्वर की कृपा से पुत्र प्राप्त हुआ | दरिद्र योग में होने के बाद भी -बिहार ,उत्तर प्रदेश एवं मुम्बई में उत्तम शिक्षा मिली फिर भी अधूरे रहे | सदा धर्म पथ पर रहे ,सबकी उन्नति सदा चाही ,एक सुन्दर समाज की सोच सदा रही ,शिक्षा का महत्व सर्व प्रथम दिया ,जहाँ भी रहा उसे सदा अपना समझा फिर भी किसी का नहीं हो सका | ---अब आपके मन में प्रश्न उठ रहा होगा --ऐसा क्यों --तो सुनें ---भले ही ज्ञान से परिपूर्ण था ---मेरा पराक्रम क्षेत्र एवं सगे -सम्बन्धियों से कदापि लाभ नहीं मिलना था --पर मेरे कोई मार्गदर्शक नहीं थे --अगर होते तो हमें क्या करना चाहिए यह बताते --ऐसा नहीं होने पर --चूँकि मैं सिंह लग्न का हूँ एवं मंगल से युक्त सूर्य देव लग्न में हैं --अर्थात नहीं कैसे होगा कोई काम --यह जो हौसला था मेरा-- बहुत ही मजबूत था | ऐसी स्थिति में व्यक्ति की एक अलग धुन होती है -वो केवल पागल की तरह चलता रहता है कर्मपथ पर --ऐसी स्थिति में उसका विस्वास ही प्रेरणादायक बन जाता है --फिर स्वयं ऐसे अभागे को भी परमात्मा अपने दोनों हाथों से उठाते हैं | अगर मुझे ज्योतिष का ज्ञान तब होता  --तो कदापि आगे नहीं बढ़ता --क्योंकि जीवन में भाग्य कर्म से ही बनता है --अतः मैं कर्म पथ पर आरूढ़ रहा --भाग्य की परवाह नहीं की -जबकि भाग्य मेरा अच्छा है --उसकी चर्चा आगे करूँगा | आप सभी से एक ही बात कहना चाहते हैं --भले ही भाग्य साथ न दे पर कर्मक्षेत्र पर हर व्यक्ति को आरूढ़ रहना चाहिए --आज मैं जहाँ हूँ -भले ही मान्यता प्राप्त एक शिक्षक नहीं हूँ किन्तु मेरी सोच सही है तो मुझे ईस्वर की कृपा प्राप्त है --हर पल वो मुझे मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करते रहते हैं | --आज के समय जबकत बालक कामयाव नहीं होता है तब तक विवाह नहीं होता है --किन्तु मेरा विवाह भी हो चूका था एक बच्ची भी थी -तब दरिद्र होकर भी मुम्बई पढ़ने गया और पढ़कर ही आया | -------भवदीय निवेदक खगोलशास्त्री झा मेरठ -ज्योतिष की समस्त  जानकारी के लिए इस लिंक पर पधारें khagolshastri.blogspot.com  



गुरुवार, 11 सितंबर 2025

आत्मकथा का उत्तर भाग -2 -सुनें -खगोलशास्त्री झा मेरठ


मेरी कुण्डली का चौथा घर -आत्मकथा पढ़ें -भाग -118 - ज्योतिषी झा मेरठ


ॐ -प्रिय पाठकगण --ज्योतिष वास्तव में एक दर्पण है | जैसे ऑंखें भी होतीं हैं ,नजदीक वस्तु भी होती है --पर कभी -कभी दिखती आँखों को वस्तु नहीं है | --इसका अर्थ जल्दबाजी होती है --थोड़ी सी शान्ति व्यक्ति रखे तो वह वस्तु जो दिखती नहीं थी --थी सामने -शान्ति हुए तो मिल जाती है --वैसे ही जीवन में गुरु का मार्गदर्शन होता है | -मेरी कुण्डली की नीव बहुत ही मजबूत है --तो धन एवं कुटुंब अच्छे रहे भले ही हमने महत्व नहीं दिया | जब धन और कुटुंब का महत्व नहीं दिया --तो फिर प्रभाव कमजोर होना लाजमी था --क्योंकि जो व्यक्ति धन और परिजनों का आदर नहीं करेगा तो -उसे ये दोनों परित्याग कर देते हैं --इसका परिणाम यह होता है -व्यक्ति के पास अपने संसाधन तो होते हैं -पर वह अकेला होता है --यह स्थिति मेरे साथ रही | ---अस्तु ---अब चौथे घर की बात करें तो -यह घर  सुख पूर्ण रूपेण मिले --क्यों --क्योंकि चौथे घर और भाग्य का स्वामी सूर्य के साथ बहुत ही मजबूत है | सम्पूर्ण जीवन हमने इस घर पर बहुत ही अन्वेषण किया --हमने देखा ज्यादातर बड़े लोगों की कुण्डली में ऐसा योग था | जब हम -11 वर्ष के थे तब से इस स्थिति को बहुत ही ढूंढा --जहाँ भी गया उन ज्योतिषी गुरु ने कहा एक दिन तुम राजा बनोगे | जब हम -10 वर्ष के हुए --तो राहु की दशा प्रारम्भ हुई --यह दशा -28 वर्ष के जब हुए तब तक रही --संयोग से -शिक्षा ,दीक्षा ,विवाह ,संतान ,पालयन इसी दशा में हुए | मेरी कुण्डली में राजयोग था फिर भी हम महादरिद्र थे | जब हम -28 वर्ष के हुए और गुरु की दशा प्रारम्भ हुई --अनायास राजयोग शुरू हुआ --फिर वाहन ,भवन ,दाम्पत्य सुख ,शिक्षा ,संतान सभी राजयोग में बदल गए | तब मैं अधूरा पंडित था --सभी ग्रन्थ तो जिह्वा पर थे पर मार्गदर्शन नहीं था | एकदिन अनायास शिव की शरण में रोने लगे -कैसे चलूँ ,क्या करू --मानों अनायास राजयोग का दौर शुरू होने वाला था तो ईस्वर प्रेरणा भी अनायास ही दी | मानों स्वयं भोलेनाथ -मंदिर से मेरे ह्रदय में समा गए --और प्रेरणा के श्रोत बन गए | 10 वर्ष से लेकर जब हम -28 वर्ष के हुए -अपने हों या पराये सभी ठोकर मारते गए | सारे परिजन होते हुए भी अकेले चल रहे थे ,हमारे धन पर सभी राज कर रहे थे फिर भी हम उनके लिए ही जी रहे थे | किसी तरह से पनाह मिले यही सोच थी --सबसे पहले माँ ने त्याग दिया ,फिर पिता ने त्याग दिया ,फिर भाई ,बहिन ,मामा सबने त्याग दिया | मेरी पतनी और बच्ची को जो तकलीफ हुई -उसकी क्या गाथा लिखू  | जब राजयोग शुरू हुआ तो अकेले चलने लगा --क्योंकि ठोकर से अकल आ चुकी थी | --ऐसा इसलिए हुआ --मेरी कुण्डली में सूर्य लग्न का राजा है --जो मुझे जन्मजात  वसूलों का पक्का बनाता है ,थोड़े में खुश रहने का सिद्धांत देता है --मंगल होने से कर्मठ और जुझारू बनाता है --किन्तु यहाँ केतु है --इसका अर्थ है --जो मेरी मातृ सुख है -जो दिखता है --वो सच नहीं है --माँ ऊपर से तो प्रेम करेगी --किन्तु ह्रदय में छल है साथ ही भाग्य के क्षेत्र का स्वामी भी केतु के साथ लग्न में है --इसका अर्थ है --सबकुछ होने के बाद भी भाग्य का सुख एक छलावा रहेगा | जबतक -परिजन हों ,शिष्य हों ,मित्र हों ,पड़ोसी हों --खिलाते रहेंगें --ये अपने रहेंगें --अन्यथा ये सभी शतु की तरह व्यवहार करेंगें | --यह अनुभव जब हम -55 वर्ष के हुए तब हुआ | अगर मुझे एक सही मार्गदर्शन दाता मेरे पास होते तो हम सुखी होते --जब मुझे आज ईस्वर की प्रेरणा से अब अनुभव हुआ --तो वास्तव में मैं अब सुखी हुआ | अतः सभी पाठक जीवन में किसी न किसी का मार्गदर्शन अवश्य लें सुखी होना है तो ----भवदीय निवेदक खगोलशास्त्री झा मेरठ -ज्योतिष की समस्त  जानकारी के लिए इस लिंक पर पधारें khagolshastri.blogspot.com  


गुरुवार, 4 सितंबर 2025

मेरी कुण्डली का तीसरा घर -आत्मकथा पढ़ें -भाग -117 - ज्योतिषी झा मेरठ


ज्योतिष के मेरे प्रिय पाठकगण --मेरी कुण्डली वैसे बहुत ही सशक्त ,मजबूत है --किन्तु यह तीसरा घर -जिससे  व्यक्ति का पराक्रम का अनुमान लगाया जाता है एवं -भाई -बहिन के साथ कितनी मजबूती रहेगी -इसका विचार किया जाता है | -ईस्वर ने हमें जोर का झटका दिया --क्यों ? --क्योंकि यहाँ गुरु -बृहस्पति शुक्र राशि में उपस्थित हैं --एक तो यह घर गुरु का अपना नहीं है -शत्रु क्षेत्र में गुरुदेव हैं साथ ही इस तीसरे घर पर शनिदेव जो भाग्य में विराजमान हैं --इस घर को पूर्ण दृष्टि से देख रहे हैं --इसका अभिप्राय है -मैं भले ही कितना ही ज्ञानी हूँ या धर्मानुरागी या फिर अनंत गुणों से युक्त हूँ --जीवन भर यहाँ मेरी नहीं चली | हमने कभी किसी को धोखा नहीं दिया ,हमने कभी किसी का कुछ नहीं लिया ,हम अपने धन में ही खुश सदा रहे हैं ,सबको शिक्षाविद एवं सुसभ्य बनाने का सदा प्रयास किये | कोई भी शिष्य हो या अपने सबको धर्म युक्त मार्ग ही बताया है --केवल एक अवगुण मेरे में था --गलती मत करो ,याचना मत करो ,परिश्रम से धन कमाओ ,स्वाभिमान से जिओ ,जितना है प्रसन्न रहो --अधिक पाने के लिए सार्थक प्रयास करो या फिर ईस्वर अधीन हो जाओं --इन अवगुणों के कारण कभी भी मैं जीत नहीं सका --पराक्रम को या प्रजाओं को --क्यों ? --क्योंकि -मेरे भाग्य के क्षेत्र में नीच का शनि है --अतः मेरे जितने भी सगे -सम्बन्धी रहे या शिष्य या यजमान वो -धनाढ्य तो थे किन्तु अल्पज्ञानी थे ---अतः जिस प्रकार चोर के सामने व्यक्ति लाचार होकर अपने को तो समर्पित कर देता है --किन्तु मन यह रहता है -अगर कोई मेरी सहायता करे तो इस चोर को बता दूंगा मैं भी कोई चीज हूँ | ऐसा ही मेरे साथ सदा रहा --सबसे पहले माता पिता को सशक्त बनाना चाहा --वो बनें भी किन्तु अनुज का साथ मिलने पर हमें सबसे पहले नकार दिए | अपने अनुज को शिक्षित करना चाहा ,आज भी उसके पास उतनी सरस्वती हैं -पर धन आने पर -वो सबसे पहले मुझे ही तिरस्कृत किया | -जब हम 29 वर्ष के हुए --सभी परिजन होते हुए भी मैं अकेला था -तो एक यजमान को ही सगा समझने लगा --पर अंत में बाल -बाल धन से बचा अन्यथा -कुछ नहीं बचता | एक और दौर आया --20 17 में एक और यजमान से दोस्ती हो गयी --हुआ यह उसकी एक पूजा की जिसके प्रभाव से उसके घर की एक विषम कथा उजागर हो गयी जिसे न तो हम जानते थे न वो | इस बात से वो मित्र विक्षिप्त रहने लगा -उसकी आयु के लिए फिर जाप किये -वो मृत्यु से बच गया ,उसके बाद एक और पूजा हुई -उसके बाद --उसकी दुकान माँ के  नाम थी -जो हमने प्रयास किया उसके नाम हो जाय हो गयी | उसके बाद मकान उसकी पतनी के नाम करबाने का प्रयास किया वो भी हो गया ,उसके बाद --उसका कारोबार समाप्त हो गया -हमारा उठना -बैठना एक साथ था -हमने कईबार कहा अगर तुम सही राह नहीं चलोगे तो बदनामी हमारी होगी --बहुत दिनों के बाद पत्ता चला -इसके पास धन बहुत है पर कर्जदारों को देना नहीं चाह रहा है --ऐसी स्थिति में --हमने कहा दुकान सबसे - कहो बेच दी और बैंक का कर्ज चुकाया --यह दुकान पंडितजी को दे दी जबकि सच यह था -दुकान उसकी ही थी ,जीएसटी उसके नाम ,पूंजीं उसकी थी, कमाई में आधा -आधा के दोनों हक़दार थे | उसकी पतनी को भी इस सच्चाई से दूर रखा ,--इसका परिणाम यह हुआ वो सबके कर्जदार होने के बाद भी मेरी वजह से बिना धन दिए  मुक्त हो गया | अब कारोबार भी ठीक हो गया ,बाल बच्चे भी सही हो गए | जब वो चारो तरफ से सुरक्षित हो गया तो हम चाहने लगे उसकी पतनी को सभी बातों से अवगत करा दूँ --एवं हम अलग हो जाय क्योंकि मेरा मकसद उसे सही करने का था --एक दिन उसने मेरा इतना अपमान किया कि हम अपना -50 हजार छोड़कर एवं माह का हिस्सा छोड़कर चल दिए-- पर --कभी उस व्यक्ति ने न हो हिसाब दिया न ही गलती की क्षमा मांगी | --अब आपलोगों के मन में एक प्रश्न उठा होगा --ऐसे-- कैसे अपमान कर दिया --तो सुनें --जब हम साथ -साथ थे और बाहर से मुझे गरीब दिखा --तो हमने अपने घर का कूलर और अपने बालक की साइकिल दी --एकदिन बोला -मेरी घरवाली बोली शनिदान दिया है अतः बेचकर पैसे खा गया , हमने पूछा --जो धन खाया उसमें शनि नहीं था --और सुनों वो साइकिल मेरे बालक की थी --तुमने बेचकर अच्छा नहीं किया --मैं तुमसे बहुत नाराज हूँ --इसके बाद हमने कहा मैं तुम्हारा गुरु नहीं हूँ --पैर मत छूआ करो --उसके मन कई शंका उठने लगी --फिर क्या था -उसके सब काम बन चुके थे --जब दुनिया का धन खा गया तो मेरा धन खा जाये --इसमें कौन सी बड़ी बात है | ---अस्तु --कहने का अभिप्राय है --कुण्डली का यह ज्ञान मुझे था --पर मेरे कोई मार्गदर्शक नहीं थे --जिनसे कोई सलाह लेता --अतः कईबार मैं भावनाओं में बहक जाता हूँ --इससे चाहे अपने हों या पराये मुझे चोट बहुत ही पहुंची है | --मेरी कुण्डली --यह तीसरा घर सबसे हानि दी है --जिसका अनुभव अब हो रहा है ----अगले भाग में कुण्डली  के चौथे 


घर की चर्चा करेंगें ----भवदीय निवेदक खगोलशास्त्री झा मेरठ -ज्योतिष की समस्त  जानकारी के लिए इस लिंक पर पधारें khagolshastri.blogs

खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ

नूतन संवत -2083 -यानि -2026 +27 -भविष्यवाणी -पढ़ें -खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ

ॐ संवत -2083 का आगमन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा अर्थात -दिनांक -19 /03 /2026 को मीन राशि के चंद्र और उत्तर भाद्रपदा  नक्षत्र में होगा |  नव वर्ष प...