ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी -ज्योतिषी झा मेरठ

ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी -ज्योतिषी झा मेरठ
ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी -ज्योतिषी झा मेरठ 1 -कुण्डली मिलान का शुल्क 2200 सौ रूपये हैं | 2--हमसे बातचीत [परामर्श ] शुल्क है पांच सौ रूपये हैं | 3 -जन्म कुण्डली की जानकारी मौखिक और लिखित लेना चाहते हैं -तो शुल्क एग्ग्यारह सौ रूपये हैं | 4 -सम्पूर्ण जीवन का फलादेश लिखित चाहते हैं तो यह आपके घर तक पंहुचेगा शुल्क 11000 हैं | 5 -विदेशों में रहने वाले व्यक्ति ज्योतिष की किसी भी प्रकार की जानकारी करना चाहेगें तो शुल्क-2200 सौ हैं |, --6--- आजीवन सदसयता शुल्क -एक लाख रूपये | -- नाम -के एल झा ,स्टेट बैंक मेरठ, आई एफ एस सी कोड-SBIN0002321,A/c- -2000 5973259 पर हमें प्राप्त हो सकता है । आप हमें गूगल पे, पे फ़ोन ,भीम पे,पेटीएम पर भी धन भेज सकते हैं - 9897701636 इस नंबर पर |-- ॐ आपका - ज्योतिषी झा मेरठ, झंझारपुर और मुम्बई----ज्योतिष और कर्मकांड की अनन्त बातों को पढ़ने हेतु या सुनने के लिए प्रस्तुत लिंक पर पधारें -https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut

मंगलवार, 2 दिसंबर 2025

मेरी कुण्डली का बारहवां घर आत्मकथा पढ़ें -भाग -126 - ज्योतिषी झा मेरठ

हमारे प्रिय पाठकगण --किसी भी कुण्डली के बारहवें  घर से -व्यक्ति का सत्संग और  धन खर्च करने के तरीके पर बिचार किया जाता है |  मेरी कुण्डली सिंह लग्न की है -लग्न में सूर्यदेव और मंगल + केतु उपस्थित हैं --ये  हमारे स्वभाव और प्रभाव को बहुत ही सशक्त बनाये हैं ---किसी भी व्यक्ति का स्वभाव तभी मजबूत हो सकता है --जब वह स्वस्थ और धनवान हो --अतः मेरी कुण्डली का दूसरा घर भी बहुत मजबूत है --बुध +शुक्र के साथ | जब व्यक्ति का स्वभाव + प्रभाव और स्वास्थ के साथ धन हो तो शान से व्यक्ति जीता है --अतः बारहवें घर का स्वामी चन्द्रमा उच्च का कर्मक्षेत्र में बिराजमान है --अतः --मेरा सत्संग  और खर्च करने के तरीके निराले रहे हैं | उत्तम भोजन ,उत्तम वस्त्र ,उत्तम रहन -सहन ,उत्तम सत्संग के साथ जीवन शैली उत्तम दर्जे की रही है |  मेरी किताब हों ,वस्त्र हों ,निवास हो या सत्संग धवल सदा रहते हैं | इसलिए हमारी किसी से बनती नहीं है | --जब व्यक्ति के प्रथम  ,द्वितीय और द्वादश ये घर उत्तम हों --तो अहंकारी होना स्वभावतः सत्य है --इसलिए कभी दोस्ती किसी से ज्यादा चलती नहीं है --सदा अकेले जीने का स्वभाव रहा है  | -एक बात ध्यान दें -धन हो और सही खर्च करें  यह हो ही नहीं सकता है | स्वभाव का मजबूत हो प्रभावशाली हो तो -ऐसा व्यक्ति दबकर नहीं रहता | खर्च सात्विक हो विवेक से हो --तो सत्संग अल्प  होगा --अतः ऐसे व्यक्ति का जीना दुर्लभ हो जाता है --इसलिए हमारा प्रभाव क्षेत्र और सगे -सम्बन्धियों से कभी बनी नहीं | --यह बात सौ प्रतिशत सही है | -----अस्तु --- दोस्तों हमने किताबों को पढ़ने के बाद और अपने अनुभव करने के बाद यह अनुभव किया है -केवल सही मार्गदर्शन किसी भी व्यक्ति को नहीं मिलने के कारण --वो अधूरा रहता है |  अपनी जगह किताब भी सही है --तो अपनी जगह अनुभव भी सही होता है --केवल तालमेल बिठाने के लिए अगर व्यक्ति को शास्त्रों का ज्ञान भी हो जाय और उत्तम मार्गदर्शन दाता का सान्निध्य मिल जाय --तो वो व्यक्ति बड़ा भाग्यशाली होता है | मेरे जीवन में ज्ञान तो खूब मिला पर --गुरु भी बहुत ही उत्तम थे किन्तु --हमारे माता पिता और समाज अनपढ़ था --इसके बाद ज्ञान के लिए तो बिहार से होते हुए ,यू पी से होते हुए मुम्बई तक पहुंचे --केवल ज्ञान अर्जित करते रहे --पर सही गुरु का सान्निध्य -बिहार में -16 वर्ष में छूट गया | अतः मेरा जीवन अधूरा रहा --ज्ञान से पूर्ण होने के बाद भी विवेक रूपी वरदहस्त  गुरु का नहीं रहा | --हम अपने पाठकगण से एक ही अनुरोध करना चाहते हैं --भले ही ज्ञान बहुत हो जाय किन्तु  मार्गदर्शन में रहेंगें तो --विवेक बना रहेगा अन्यथा --सबकुछ होगा  मेरी तरह पर अपने आपको एकदिन अकेला पायेंगें |  मुझे जीवन में सबकुछ मिला जो चाहा हमने --वस्त्र हों ,भवन हों , उत्तम रहन -सहन हों ,ज्ञान हों --पर विवेक हीन रहा --माता पिता के साथ -साथ परिजनों को शास्त्रों से जीतना चाहा --जो कुछ देर के लिए तो ठीक था पर दीर्घकाल इसका प्रभाव नहीं रहा | भारतीय समाज --किताबों पर शास्त्रों पर आधारित तो है --पर जीवन शैली  इसके विपरीत  है | सभी माता पिता अपने बच्चों को बड़ा तो बनाना चाहते हैं --पर खुद बड़ा नहीं बनना चाहते हैं --इसलिए --पिता का पुत्र से मेल -किताबों  का नहीं आत्मा  का होता है ,समाज का समाज से मेल किताबों  से नहीं भावना से होता है | इस कारण से समाज में दो तरह के जीवन होते हैं --एक शिक्षा का और दूसरा व्यवहार का --हर व्यक्ति को जबतक दोनों ज्ञान नहीं होंगें --पग -पग पर युद्ध होता रहता है --मैं बड़ा तो मैं बड़ा ----जब हम -55 साल के हो गए --तो हमें लगता है -वास्तव में मुझसे ज्ञानी सभी हैं --सबसे छोटा मैं ही इस संसार में हूँ --अतः अब न तो कोई मेरा शत्रु है न मित्र --सिर्फ हम अपने कर्तव्य पथ पर चलना चाहते हैं --दूसरे को आगे बढ़ते देखना चाहते हैं | --दोस्तों ---हमने अपनी कुण्डली के सभी भावों को दर्शाया --इस संसार में सभी में कुछ न कुछ कमी होती है --उन कमियों को सिर्फ मार्गदर्शन और छोटा बनकर ही ठीक किया जा सकता है --अतः आगे मेरा यही प्रयास रहेगा | ॐ श्रीसरस्वत्यै नमः ॐ | --आगे सिर्फ आत्मकथा के 5 भागों को लिखने के बाद समाप्त करेंगें --उन भागों में कुण्डली और कर्मकाण्ड पर विवेचन करेंगें | -भवदीय निवेदक खगोलशास्त्री झा मेरठ -ज्योतिष की समस्त  जानकारी के लिए इस लिंक पर पधारें ---https://khagolshastri.blogspot.com/



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