ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी -ज्योतिषी झा मेरठ

ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी -ज्योतिषी झा मेरठ
ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी -ज्योतिषी झा मेरठ 1 -कुण्डली मिलान का शुल्क 2200 सौ रूपये हैं | 2--हमसे बातचीत [परामर्श ] शुल्क है पांच सौ रूपये हैं | 3 -जन्म कुण्डली की जानकारी मौखिक और लिखित लेना चाहते हैं -तो शुल्क एग्ग्यारह सौ रूपये हैं | 4 -सम्पूर्ण जीवन का फलादेश लिखित चाहते हैं तो यह आपके घर तक पंहुचेगा शुल्क 11000 हैं | 5 -विदेशों में रहने वाले व्यक्ति ज्योतिष की किसी भी प्रकार की जानकारी करना चाहेगें तो शुल्क-2200 सौ हैं |, --6--- आजीवन सदसयता शुल्क -एक लाख रूपये | -- नाम -के एल झा ,स्टेट बैंक मेरठ, आई एफ एस सी कोड-SBIN0002321,A/c- -2000 5973259 पर हमें प्राप्त हो सकता है । आप हमें गूगल पे, पे फ़ोन ,भीम पे,पेटीएम पर भी धन भेज सकते हैं - 9897701636 इस नंबर पर |-- ॐ आपका - ज्योतिषी झा मेरठ, झंझारपुर और मुम्बई----ज्योतिष और कर्मकांड की अनन्त बातों को पढ़ने हेतु या सुनने के लिए प्रस्तुत लिंक पर पधारें -https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut

गुरुवार, 11 दिसंबर 2025

आत्मकथा की अन्तिम बातों को पढ़ें -भाग -127 - ज्योतिषी झा मेरठ

आत्मकथा के पाठकगण - यह आत्मकथा भले ही हमने लिखने का प्रयास किया है --कोई भी व्यक्ति इस आत्मकथा को पढ़ेगा --तो उसे ऐसा प्रतीत होगा -यह कथा मेरी लिखी गयी है | यह सच है -हर व्यक्ति सुख दुःखों से गुजरता है | हर व्यक्ति की बढियाँ जिन्हें की तमन्ना होती है --पर भाग्य के आगे वह लाचार होता है या सही मार्गदर्शन नहीं मिलने के कारण  योग्य होने के बाद भी दुःखों को झेलता है | मैं अपने पिता से बहुत स्नेह करता हूँ --पर आपस में हमारा संवाद कभी नहीं हुआ --मुझे यह नहीं अनुभव हुआ पिता क्या चाहते हैं --पिता को यह कभी भरोसा नहीं हुआ हम उनके लिए ही सबकुछ कर रहे हैं | -जब हम सुखद जीवन जी रहे थे - तो हमें लगा -सबकुछ है फिर भी पिता से नफरत क्यों हैं --हमारे मार्गदर्शन देने वाले नहीं थे --तो हमने जीवनी लिखने का प्रयास किया --उसमें यह ढूंढ रहा था  कमी कहाँ रह गयी -33 भाग लिखने के बाद पिता दिवंगत हो गए | उसके बाद मेरी सरस्वती चली गयी -न तो उसके बाद गाना गाया ,न ही उमंग रही ,न ही जीने की तमन्ना --यह बात -2018 की है | आज -11 /12 /2025 है --तबसे आज तक मैं मन से स्वस्थ नहीं हुआ | खाना ,पीना ,पहनना ,जीना सबकुछ हो रहा है --पर यह मेरा शरीर ,मेरा मन अशांत है -- यह बात न तो मेरी पतनी को पत्ता है न ही परिजनों को न ही बच्चों को | सबको लगता है --देखने में ठीक - ठाक है ,खाता -पीता है --हँसता -बोलता है --फिर यह बीमार कैसे हो सकता है | ---अस्तु ----जीवन में हमने यह अनुभव किया है --सुख -दुःखों  का सामना वही व्यक्ति कर सकता है --जिसे विरासत में मार्गदर्शन मिला हो | मुझे यह कष्ट नहीं है कि मुझे दुःख बहुत मिले ,--मुझे यह दुःख है --जो बातें शास्त्र -पुराणों में कही गयीं हैं -अगर एक शास्त्री नहीं माने तो कौन मानेगा | दूसरी बात अगर शास्त्रों के पथ पर चले तो जीवन जीना दुर्लभ है --ऐसी स्थिति में सिर्फ मार्गदर्शन ही काम आ सकता है | आज जो ज्ञान मिला वो पिता का योगदान के कारण किन्तु -पिता अनपढ़ थे -तो उनकी नजर में छलिया था ,तेज था | दोस्तों --1996 में घड़ी सीखने की नौकरी की सफलता नहीं मिली | 1997  में नौकरी की स्प्रिंग में टेम्पर चढाने की सफलता नहीं मिली --जबकि पढ़ा -लिखा शास्त्री थे | कोई नौकरी नहीं मिली या हम उस योग्य नहीं थे या भाग्य ही अच्छा नहीं था --ज्योतिष के सभी ग्रन्थ जिह्वा पर थे -पर ज्योतिषी नहीं थे ,वेद के बहुत अध्याय जिह्वा पर थे -फिर भी बेरोजगार थे ,संगीत के दसों ठाठ जिह्वा पर थे फिर भी बेरोजगार थे | सात भाषा की जानकरी थी फिर भी बेरोजगार थे | --बात -1990 की है --रेडियो स्टेशन दिल्ली चला गया --उन्हौनें --इतना लताड़ा की पढ़ने मुम्बई चला गया -1991 में | 1994 में पिता के कारण मुम्बई की शिक्षा छोड़कर घर आ गए --घरवाली का मंगलसूत्र बेचकर पिता का कर्ज चुकाया --फिर भी पिता का नहीं हो सका | 2000 से 2009 तक संगीत की उत्तम शिक्षा ली फिर भी अधूरे रहे | 2010 से नेट की दुनिया में आया --आज -11 /12 /2025 है --आजतक सिर्फ मेहनत की है | सभी ज्ञान जो मुझमें था लिखा ब्लॉगपोस्ट पर -पर कुछ नहीं मिला |  जीवन भर कुछ न कुछ करता रहा पर आजतक किसी लाइक नहीं हुआ | मैं व्यक्तिगत किसी को शत्रु मानता  ही नहीं हूँ --फिर भी सबका शत्रु हूँ | --वसुधैव कुटुम्बकम --मानता हूँ फिर भी अपने आपको अकेला पाता हूँ | क्यों ----क्योंकि भले ही हमने बहुत मेहनत की ,भले ही बहुत पढ़ाई की --यह मैं ही तो सोचता हूँ --इस मैं को सिर्फ मार्गदर्शन दाता ही ठीक कर सकते थे --जो नहीं मिले | अगर व्यक्ति -पतनी की ,भाई की ,मित्र की ,माता पिता की ,गुरुजनों की या संत --महात्माओं की शरण में रहेगा तो --उसका अहंकार समाप्त होगा अन्यथा --मेरी तरह जियेगा | उम्मीद करता हूँ --मेरी आत्मकथा से सभी पाठक यह बात सीखेंगें | अब केवल एक भाग और लिखने के बाद आत्मकथा पूर्ण हो जाएगी --ॐ | -भवदीय निवेदक खगोलशास्त्री झा मेरठ -ज्योतिष की समस्त  जानकारी के लिए इस लिंक पर पधारें ---https://khagolshastri.blogspot.com/




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