प्रिय पाठकगण -हम अपनी आत्मकथा में जो बताना चाहते हैं --उसके लिए पहले ठीक से मुझको समझना होगा ,तभी यह पुस्तक बनेगी | ---अस्तु --2002 -अनुज का विवाह हो गया और हम सम्मिलित नहीं हुए विवाह में तब से नई युगलबन्दी मेरे घर में शुरू हुई -पिता को जो माँ पढ़ाती थी वही पिता पढ़ने लगे | मेरी दो कन्या थी पिता दोनों को बहुत मानते थे पर अब वो भी तिरस्कार करने लगे क्योंकि अब हम सजग हो चुके थे | जब 14 वर्ष के थे तब से घर में धन की सहायता मैं करता आ रहा था 2001 तक | अब हम मेरठ में ही स्थापित होना चाह रहे थे साथ ही यहीं निवास लेने की सोच रहे थे | घर में फालतू का धन देना नहीं चाह रहे थे --क्योंकि अनुज का विवाह होते ही जमीन उसके नाम खरीदी गयी ,उसके जेवर सभी सही सलामत थे | मेरी शादी होते ही जेवर बिक चुके थे ,भैस भी बिक चुकी थी ,हमारे धन से चाय+ सर्बत का नित्य भण्डारा होता था ,हमारे घर में दीदी का सम्पूर्ण साम्राज्य था और सभी पल रहे थे --ऐसी स्थिति में मामा भी लाभ ले रहे थे | मेरा राजयोग चल रहा था ,पतनी ,बच्चे मेरठ में हमारे साथ रह रहे थे | हमने धर्म निभाया था -हमें धर्म अपनी गोद में उठा रहा था | सारा धन माता पिता को समर्पित कर चूका था --पर जब राजयोग होता है --तो फल भी मिलता है --यह चर्चा आगे करूँगा | 2002 अब माता पिता अनुज को मजबूत करना चाह रहे थे | उस समय अनुज भी सशक्त रोजगार के क्षेत्र में था साथ ही हम दोनों शिव चौक मन्दिर मेरठ में साथ -साथ 17 माह रहे थे 1997 +1998 में | 1999 में कूटनीति के तहत अनुज हमें तिरस्कृत कर चूका था | पनाह एक मित्रने दी थी --किन्तु राजयोग के प्रभाव के कारण किसी यजमान की शतचण्डी हमने की --और माँ आदिशक्ति की कृपा से मुझे एक मन्दिर मिला निवास के साथ --कृष्णपुरी धर्मशाला देहली गेट मेरठ --1999 में | --अब हमारे माता पिता ,अनुज को लगा --ये तो हाथ नहीं आएगा --अतः पिता मेरठ आये अनुज के पास पर नित्य मिलने आते थे मेरे पास --हम यथाशक्ति सत्कार करते थे | पिता बोले 17 माह में उसके पैसे हैं तुम्हारे पास 50000 हजार दे दो --हमने कहा मेरे पास सारा लेखा -जोखा है 30000 हैं दोनों आधा -आधा बाँट लेते हैं | अनुज पिता से झूट बोला नहीं 50000 हैं --हमने हिसाब किताब देखने की बात कही --पिता बोले --चलो उसका हिस्सा मुझे दे दो --हमने 15000 दे दिए ये धन लेकर पिता गांव चले गए | अब हम समझने लगे मेरी शादी के बाद गहने भी बिक गए ,भैस भी बिक गयी जो जमीन गिरवी थी उसे हमने छुड़ाई --पर आज अनुज की शादी के बाद गहने भी उसके हुए ,जमीं भी उसकी हुई --ये तो अन्याय है | 2003 में हमने कर्ज लेकर एक छोटा सा घर लिया प्रेम विहार माधवपुरम मेरठ में --अब पिता बोले इसमें आधा हिस्सा अनुज का भी है | अब हम सभी परिजनों के शत्रु होते गए ----आत्मकथा की अगली बात को -आगे के भाग में पढ़ने हेतु लिंक पर पधारें - https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut
ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी -ज्योतिषी झा मेरठ
ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी -ज्योतिषी झा मेरठ 1 -कुण्डली मिलान का शुल्क 2200 सौ रूपये हैं | 2--हमसे बातचीत [परामर्श ] शुल्क है पांच सौ रूपये हैं | 3 -जन्म कुण्डली की जानकारी मौखिक और लिखित लेना चाहते हैं -तो शुल्क एग्ग्यारह सौ रूपये हैं | 4 -सम्पूर्ण जीवन का फलादेश लिखित चाहते हैं तो यह आपके घर तक पंहुचेगा शुल्क 11000 हैं | 5 -विदेशों में रहने वाले व्यक्ति ज्योतिष की किसी भी प्रकार की जानकारी करना चाहेगें तो शुल्क-2200 सौ हैं |, --6--- आजीवन सदसयता शुल्क -एक लाख रूपये | -- नाम -के एल झा ,स्टेट बैंक मेरठ, आई एफ एस सी कोड-SBIN0002321,A/c- -2000 5973259 पर हमें प्राप्त हो सकता है । आप हमें गूगल पे, पे फ़ोन ,भीम पे,पेटीएम पर भी धन भेज सकते हैं - 9897701636 इस नंबर पर |-- ॐ आपका - ज्योतिषी झा मेरठ, झंझारपुर और मुम्बई----ज्योतिष और कर्मकांड की अनन्त बातों को पढ़ने हेतु या सुनने के लिए प्रस्तुत लिंक पर पधारें -https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut
सोमवार, 6 नवंबर 2023
आत्मकथा में पहले ठीक से मुझको समझना होगा-पढ़ें - भाग -69 ज्योतिषी झा मेरठ
आत्मकथा क्यों लिखी या बोली सुनें -ज्योतिषी झा मेरठ
दोस्तों आत्मकथा एक सोपान हैं | प्रथम सोपान एक से तैतीस भाग तक ,दूसरा सोपान तैतीस भाग से बानवें भाग तक और अन्तिम सोपान बानवें भाग से अन्त तक -इसके बारे में कुछ कहना चाहता हूँ सुनें --आपकी राशि पर लिखी हुई बातें मिलती है कि नहीं परखकर देखें -
khagolshastri.blogspot.com
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