ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी -ज्योतिषी झा मेरठ

ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी -ज्योतिषी झा मेरठ
ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी -ज्योतिषी झा मेरठ 1 -कुण्डली मिलान का शुल्क 2200 सौ रूपये हैं | 2--हमसे बातचीत [परामर्श ] शुल्क है पांच सौ रूपये हैं | 3 -जन्म कुण्डली की जानकारी मौखिक और लिखित लेना चाहते हैं -तो शुल्क एग्ग्यारह सौ रूपये हैं | 4 -सम्पूर्ण जीवन का फलादेश लिखित चाहते हैं तो यह आपके घर तक पंहुचेगा शुल्क 11000 हैं | 5 -विदेशों में रहने वाले व्यक्ति ज्योतिष की किसी भी प्रकार की जानकारी करना चाहेगें तो शुल्क-2200 सौ हैं |, --6--- आजीवन सदसयता शुल्क -एक लाख रूपये | -- नाम -के एल झा ,स्टेट बैंक मेरठ, आई एफ एस सी कोड-SBIN0002321,A/c- -2000 5973259 पर हमें प्राप्त हो सकता है । आप हमें गूगल पे, पे फ़ोन ,भीम पे,पेटीएम पर भी धन भेज सकते हैं - 9897701636 इस नंबर पर |-- ॐ आपका - ज्योतिषी झा मेरठ, झंझारपुर और मुम्बई----ज्योतिष और कर्मकांड की अनन्त बातों को पढ़ने हेतु या सुनने के लिए प्रस्तुत लिंक पर पधारें -https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut

शुक्रवार, 28 नवंबर 2025

मेरी कुण्डली का एकादश घर आत्मकथा पढ़ें -भाग -125 - ज्योतिषी झा मेरठ

मेरी आत्मकथा के पाठकगण --एग्यारहवाँ {एकादश } कुण्डली के घर से आय किस मार्ग से या किस विधि से होगी  --ज्यादातर विचार किया जाता है साथ ही धन की स्थिति दूसरे घर से देखि जाती है | --मेरी कुण्डली में वैसे ये दोनों घर उत्तम है शास्त्रों के अनुसार --किन्तु आज के युग में शास्त्र नहीं काम करते हैं --इसलिए चाहे धर्म पर चलें या अधर्म पर दुःखी सबको होना होता है | ----अस्तु --मैं सिंह लग्न का हूँ साथ ही लग्न में सूर्यदेव हैं मंगल और केतु के साथ | कर्मक्षेत्र  और प्रभाव क्षेत्र का स्वामी शुक्र बुध के साथ दूसरे घर में है | दूसरे घर का और आय क्षेत्र का स्वामी उच्च का दूसरे घर में ही है | कर्मक्षेत्र में उच्च का चन्द्रमा है | दो दो त्रिकोणेश लग्न में उत्तम स्थिति में विराजमान है | तमाम ग्रहों के प्रभाव से मेरा जीवन राजा की तरह रहेगा --यह बात जब हम केवल 8 वर्ष के थे तो पिताजी को एक ज्योतिषी गुरु ने कही थी --एक दिन यह बालक राजा की तरह जियेगा | --उस समय मंगल की महादशा चल रही थी --जिसकी वजह से अनायास मेरे बालों में आग लग जाया करती थी --इस बात हेतु मेरे पिताजी ज्योतिषी जी के पास गए थे --संयोग से उस समय हमारे परिवार में राजयोग चल रहा था | जब हम 10 वर्ष के हुए --तो अंग्रेजी की शिक्षा से संस्कृत की शिक्षा में आ गए --अपने मत से -पहला पलायन पातेपुर --जिला वैशाली {बिहार } हुआ | इसी बीच -दीदी की शादी हुई --उस शादी में न तो हम सम्मिलित हुए न ही खबर मिली | --जब हम 12 वर्ष के हुए राहु की दशा शुरू हुई तो --यह शिक्षा छूट गयी और हम गांव आ गए तो पता चला -जमीन बेचकर दीदी की शादी हुई | इसके तत्काल ही --चोर दीदी का घर का सारा सामान ले गए | पिताजी की दुकान बिक गयी | जमीन नदी में समा गयी -पक्की तीन बीघा थी | घर गिर गया | हम महादरिद्र हो गए | अंत में अनुज भी सर्पदंश से मर गया --यह स्थिति बहुत ही भयानक थी -- किन्तु हमारी शिक्षा चलती रही अपने बल पर | कुछ -कुछ यज्ञों से धन मैं कमाता था मां को देता था ---यह स्थिति जब हम 28 वर्ष के हुए तबतक रही | इसी बीच बिहार से मेरठ और मेरठ से मुम्बई हमारी शिक्षा चलती रही --दो बिटियां थी ,घर का वजन मेरे पर था ,पढ़ाई भी थी --अंत में हार मान ली --पढ़ना नहीं है --नौकरी नहीं मिली ---दर -दर की ठोकरे खाते रहे --एक दिन निराश होकर शिव की शरण में रोने लगा ---मानों शिव ने स्वयं अपने दोनों हाथों से उठाया | फिर राजयोग शुरू हुआ --मकान मिला ,वाहन मिला ,भूखंड मिला ,दोनों बेटियों की शीदी उत्तम हुई ,बालक की शिक्षा भी उत्तम हुई | इसके अलावा मेरी शिक्षा फिर से शुरू हुई जो आजतक चल रही है | वैसे नियमित आय का साधन कुछ नहीं है --फिर भी हम राजा हुए --यह मुझे भाग्य से मिला | हमने किसी को ठगा नहीं है ,हमने किसी को बरगलाया नहीं है हमने कभी याचना इंसानों से नहीं की है --स्वाभिमान से जीने का सदा प्रयास किया है --जो शिव की शरण में रहता है --उसे वो स्वयं उसकी देखभाल करते हैं | मुझे कईबार --आश्चर्य होता है --मैं चल कैसे रहा हूँ ,मैं जी कैसे रहा हूँ --फिर अहसास होता है --तू नहीं चलता है --तुझे कोई और चलाता है | तू नहीं कमाता है --तुझे भोले नाथ कमाकर देते हैं --अतः हम सदा शिव की शरण में रहते हैं --उन्हीं से याचना करता हूँ --वही हमारी सुनते हैं | --दोस्तों अपने जीवन में हमने सबसे ज्यादा पढ़ाई पर ध्यान दिया है -- मेरे पास सरस्वती और लक्ष्मी दोनों --बराबर मात्रा में हैं ---धन केवल जीने के लिए कमाया है --पढ़ाई केवल उत्तम समाज की रचना के लिए की है --पर लोग मुझे केवल धन से जानते हैं --इस बात का मुझे बहुत दुःख होता है | --अंत में यह कहना है -कुण्डली सच बोलती है | ---अगले भाग में मेरी कुण्डली का बारहवां 



घर पर चर्चा करेंगें ---भवदीय निवेदक खगोलशास्त्री झा मेरठ -ज्योतिष की समस्त  जानकारी के लिए इस लिंक पर पधारें ---https://khagolshastri.blogspot.com/

बुधवार, 19 नवंबर 2025

मेरी कुण्डली का दशवां घर आत्मकथा पढ़ें -भाग -124 - ज्योतिषी झा मेरठ

जन्मकुण्डली का दशवां घर व्यक्ति के कर्मक्षेत्र और पिता दोनों पर प्रकाश डालता है | --मेरी कुण्डली का दशवां घर उत्तम है | इस घर की राशि वृष है -इसका स्वामी शुक्र -बुध के साथ दूसरे घर में  विराजमान है --वैसे शुक्र नीच का है किन्तु बुध उच्च का अतः --शुक्र का नीच होना बुध की वजह से समाप्त हो गया | दशवें घर में चन्द्रमा उच्च का है | मेरी कुण्डली में लग्नेश ,त्रिकोणेश के साथ केंद्र में अकेला चद्र उच्च का होकर मुझे बहुत ही मजबूत बनाया है | धनेश बुध +शुक्र की युति ने मेरे जीवन में चार चाँद लगा दिए | जब जन्म हुआ तो राजयोग चन्द्रमा की दशा में हुआ --किन्तु इसकी अवधि के ढाई वर्ष थी अतः कम समय का राजयोग रहा | इसके बाद मंगल की अवधि भी कम रही - जब हम 10 वर्ष के हुए तो राहु की दशा शुरू हुई जो 28 वर्ष के जब हम हुए तब तक रही | यह राहु की दशा -सभी उत्तम ग्रहों पर भारी रही --शिक्षा ,दीक्षा ,नौकरी ,विवाह ,संतान ,सभी क्षेत्रों में मुझे बहुत संघर्ष रहा | केवल एक चीज बढ़िया रही -शिक्षा चलती रही --विवाह और पुत्री होने के बाद भी बहुत उत्तम शिक्षा मिली | इस शिक्षा का लाभ कभी नहीं मिला | इस शिक्षा की वजह से आज मैं सशक्त तो हूँ  किन्तु कर्मक्षेत्र आज भी प्रभु के सहारे है | अपने जीवन में शिक्षा हो या जरुरत की चीजें --खुद अर्जित की किसी ने सहता नहीं की | एक दौर ऐसा आया -शिक्षा का विरोधी पिता माता के साथ  पतनी भी बन गयी | किन्तु जब हम -28 वर्ष के हुए --साथ ही फिर से उत्तम दशा शुरू हुई तो --शिक्षा भी चलने लगी और कर्मक्षेत्र भी मजबूत हो गया | अपने जीवन में जब यह अनुभव हुआ ईस्वर ही सबकुछ हैं -उनकी शरण में रहो तो प्रभु ने मुझे दोनों हाथों से उठाया | हमें जो शिक्षा मिली उससे कभी धन ज्यादा नहीं मिला | मुझे शिक्षा में जितनी मेहनत करनी पड़ी उतना कमाने में श्रम नहीं करना पड़ा | मुझे  ज्योतिष विद्या या संगीत से या पढ़ाई से कोई धन नहीं मिला | मुझे अपने जीवन में ज्यादातर समय निरर्थक लगा | मुझे धन पुरस्कार स्वरुप मिला साथ ही यह व्यवस्था स्वयं भोले नाथ ने की | मेरा  गुजारा कैसे चलता है --आज तक पता नहीं चला | जब भी धन की जरुरत होती है --भोले नाथ से कहा वो  जरुरत से ज्यादा दे दिया करते हैं | मुझे कईबार यह अनुभव हुआ मैं कुछ नहीं कर सकता हूँ --अपने आपको शिव को समर्पित कर दिया --उन्हौनें जरुरत से ज्यादा दे दिए | मेरे पास सरस्वती ज्यादा है --किन्तु लोग मुझे धन से ज्यादा जानते हैं | माता -पिता ,परिजन सभी धन से मुझे जानते हैं | जो मेरे यजमान बनते हैं या होते हैं --उन्हौनें  हमारी सरस्वती को नहीं परख पाए --बल्कि धन से मुझे तौला है ---इस बात का मुझे बहु कष्ट होता है | मैं अपने समस्त परिजनों से दिल से प्रेम करता हूँ --किन्तु --प्रत्यक्ष नफ़रत का स्वरूर रखता हूँ --अतः व्यक्तिगत मैं किसी को शत्रु नहीं समझता --पर सभी को लगता है मैं अहंकारी हूँ  | अंत में अपने कर्मक्षेत्र के बारे में इतना कह सकता हूँ ---अनायास विशेष धन प्राप्ति का राजयोग है --सो कोई न कोई धन रूपी  पुरस्कार देता रहता है --जिसे हम खुद नहीं जानते होते हैं | अपने पिता से मैं बहुत प्रेम करता हूँ --ईस्वर और उनमें  मुझे कोई अन्तर नहीं दिखा है --पर यह प्रत्यक्ष देखने पर नहीं लगता --क्योंकि दोनों में कभी बनी नहीं | कर्मक्षेत्र में मेरी सोच है --जब गारंटी ज्योतिष या कर्मकाण्ड का यजमान महत्व देते हैं तो फिर --मुद्रा को सबसे ऊपर कर दो --इससे यह फायदा होगा --शांति से भजन करोगे अन्यथा निरंतर लोग परेशान करेंगें | ---अगले भाग में मेरी कुण्डली का   एकादश घर पर चर्चा करेंगें ---भवदीय निवेदक खगोलशास्त्री झा मेरठ -ज्योतिष की समस्त  जानकारी के लिए इस लिंक पर पधारें -- - https://khagolshastri.blogspot.com/



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खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ

नूतन संवत -2083 -यानि -2026 +27 -भविष्यवाणी -पढ़ें -खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ

ॐ संवत -2083 का आगमन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा अर्थात -दिनांक -19 /03 /2026 को मीन राशि के चंद्र और उत्तर भाद्रपदा  नक्षत्र में होगा |  नव वर्ष प...